प्रतीकात्मक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। वायु प्रदूषण मामले में सरकारी एजेंसियों द्वारा दिल्ली के औद्योगिक इकाईयों पर नियमित कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रेरित लघु उद्योग भारती ने गंभीर चिंता जताई है। उसने सरकार से इंस्पेक्टर बनने की जगह सहयोगी की भूमिका में आने का आग्रह किया है।
प्रदूषण को लेकर उद्योगों का वर्ग तय होगा
जारी बयान में कहा है कि, पर्यावरण बचाने का अभियान जब सरकारी बनकर जांच केंद्रित हो जाता है तो पर्यावरण बचाने की चिंता कहीं पीछे छूट जाती है और राजस्व संग्रह प्राथमिकता में आ जाता है। यह एक कारण है जिसके चलते पर्यावरण को संतुलित रखने के प्रयास सफल नहीं हो पाए हैं। साथ ही उद्योग आधारित सीपीसीपी के 2024 के नियम को दिल्ली में लागू करने की मांग की है, जिसमें प्रदूषण को लेकर उद्योगों का वर्ग तय किया जाना है।
इकाइयों को प्रदूषण उल्लंघन के नोटिस जारी
लघु उद्योग भारती के प्रांत उपाध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने जोर देकर कहा कि यदि सरकार इंस्पेक्टर बनने की जिद छोड़कर सामान्य जन व उद्यमियों के साथ सहयोगी की भूमिका में काम करने और आवश्यक सुधार में सहयोगी बनने का नीतिगत निर्णय लें, तो निश्चित ही सुखद परिणाम सामने आएंगे। उद्यमियों के लिए संघ प्रेरित संगठन की यह चिंता तब आई है जब पिछले एक माह में जिला स्तर पर गठित समितियों द्वारा दिल्ली भर के हजारों औद्योगिक इकाइयों को प्रदूषण उल्लंघन के नोटिस जारी हुए हैं।
पहला कैंप 21 जनवरी को बवाना में
इसलिए लघु उद्योग भारती ने अपने स्तर पर पहल के प्रयास भी तेज किए हैं, जिसमें इकाईयों की प्रदूषण में स्थिति, निकलते प्रदूषण की मात्रा, उसके लिए आवश्यक उपकरण के प्रति जागरूक करने के लिए कैंप लगाने का निर्णय किया है। पहला कैंप 21 जनवरी को बवाना में लगेगा।
इसमें सीपीसीबी, डीएसआइआइडीसी व उद्योग विशेषज्ञ उद्यमियों को जागरूक करेंगे। अगर यह सफल रहा तो अन्य औद्योगिक इकाईयों में यह आयोजन होंगे। लघु उद्योग भारती के अनुसार, सरकार ने वर्षों में दंडात्मक कार्रवाई कर देख लिया है। अब सहयोगवादी हो, जिसमें विशेषज्ञों, उद्योग संगठनों, शिक्षण संस्थानों व अभिनव प्रयोगों को भी शामिल किया जाए।
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