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खर्राटे आते हैं तो करवट लेकर साेएं; दमा से राहत के ल‍िए क्‍या होता बेहतर? PMCH के डॉक्‍टर ने दी ये सलाह

Chikheang Yesterday 20:57 views 364
  

अस्‍थमा मरीजों के लिए इस मौसम में सावधानी जरूरी।  



जागरण संवाददाता, पटना। Health News: दमा (अस्थमा) एक आम सांस रोग है, इससे लगभग 8 से 10 प्रतिशत लोग प्रभावित होते हैं। ठंड के समय इसके मामले बढ़ जाते है।

कई मामलों में यह बीमारी अनुवांशिक होती है और माता-पिता से बच्चों में स्थानांतरित हो सकती है। इसके अलावा धूल, ठंडी हवा, मौसम में बदलाव और दैनिक वातावरणीय परिवर्तन भी दमे को बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं।

दमा के लक्षणों में लगातार खांसी, हल्का स्राव (सेक्रेशन), छाती में जकड़न तथा सांस लेते समय सीटी, बांसुरी या बाजे जैसी आवाज शामिल है।

यह आवाज विशेष रूप से रात में या शांत वातावरण में अधिक स्पष्ट रूप से सुनाई देती है। दमा की पुष्टि होने पर उचित दवा शुरू की जाती है।

दमा के इलाज में इनहेलर सबसे प्रभावी और सुरक्षित विकल्प है। कई बार मरीज टैबलेट लेने की मांग करते हैं, लेकिन इनहेलर में दवा की मात्रा सीधे फेफड़ों तक पहुंचती है और इसका डोज बहुत कम होता है।

जबकि टैबलेट के माध्यम से वही प्रभाव पाने के लिए करीब 20 गुना अधिक दवा शरीर में जाती है, इससे साइड इफेक्ट का खतरा बढ़ सकता है।

रविवार को दैनिक जागरण के लाेकप्रिय कार्यक्रम हेलो जागरण में पटना मेडिकल कालेज एंड अस्पताल (पीएमसीएच) के टीबी एवं चेस्ट विभाग के विभागाध्यक्ष डा. पवन कुमार अग्रवाल ने यह बातें कहीं।

इस दौरान काफी संख्या में पाठकों ने फोन कर विभिन्न परेशानियों को लेकर जानकारी हासिल की। प्रस्तुत है चुनींदा प्रश्न व उसके जवाब।
स्पाइरोमेट्री जांच से होती है पुष्‍ट‍ि

दमा की पुष्टि के लिए स्पाइरोमेट्री जांच की जाती है। इस जांच के माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि फेफड़ों (लंग्स) की कार्यक्षमता कितनी है और सांस की नलियां कितनी संकरी हो गई हैं।

जांच के दौरान दवा देकर यह भी देखा जाता है कि नलियां कितनी खुलती हैं। यदि दवा देने के बाद सांस की नली 12 प्रतिशत से अधिक फैलती है, तो दमा की पुष्टि हो जाती है। इसके अतिरिक्त, मरीज की ब्लड जांच भी कराई जाती है।  

छाती के बाएं साइड ऊपर में दर्द होता है। सर्दी-खांसी होता क्या करें। :: मिश्रीलाल मुखिया, अदालतगंज।
- एक बार एलर्जी का टेस्ट कराना चाहिए। इसके कारण भी परेशानी होती है। धूप का सेवन करें। आवश्यक जांच कराएं। उचित उपचार के बाद ठीक हो जाएगा।

रात में सोने पर खर्राटा आता है, घर में लोग परेशान रहते है, क्या करें। - संजय सिंह गर्दनीबाग।
-खर्राटे रोकने के लिए करवट लेकर सोएं, वजन कम करें। हल्दी वाला दूध पिएं या भाप लें, ये घरेलू उपाय मदद कर सकते हैं, लेकिन अगर समस्या बनी रहे तो डाक्टर को दिखाना जरूरी है, क्योंकि यह स्लीप एपनिया जैसी गंभीर समस्या हो सकती है।

ठंड के कारण नाक से पानी आ रहा है, आवाज गड़बड़ है, क्या करें। - शादाब आलम बाढ़।
-ठंड में यह लक्षण सामान्य सर्दी-एलर्जिक राइनाइटिस के कारण होते हैं। गुनगुना पानी पिएं, ठंडा पानी न लें, दिन में दो-तीन बार भाप लें, नमक मिले गुनगुने पानी से गरारे करें। इससे आवाज बैठने में राहत मिलेगी।

हमेशा छींक आती है क्या करें। - शशिभूषण पांडेय, नौबतपुर।
-अगर हमेशा छींक आती रहती है, तो यह ज्यादातर एलर्जिक राइनाइटिस (धूल, ठंड, पराग, धुआं आदि से एलर्जी) की वजह से होता है। छींक बार-बार आने के कारण, धूल-मिट्टी, घर की धूल आदि से बचे।
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