सिंहेश्वर मवेशी अस्पताल के गेट पर नंदी ने दे दी जान।
संवाद सूत्र, सिंहेश्वर (मधेपुरा)। सिंहेश्वर में शुक्रवार की रात मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। ठंड से कांप रहे एक नंदी (गोवंश) की जान बचाने की कोशिश में जुटे स्थानीय युवकों को मवेशी अस्पताल से निराशा हाथ लगी। युवकों का आरोप है कि अस्पताल में तैनात चिकित्सक ने मदद करने के बजाय उन्हें डांट-फटकार लगाई और मौके पर जाकर इलाज करने से इंकार कर दिया। इलाज नहीं मिलने के कारण करीब एक घंटे बाद नंदी की मौत हो गई।
घटना शुक्रवार रात करीब आठ बजे की बताई जा रही है। पानी टंकी, सिंहेश्वर के पास सड़क किनारे एक नंदी को बुरी तरह कांपते देख प्रिंस कुमार समेत कुछ स्थानीय युवकों ने अपनी गाड़ी रोकी। प्रथम दृष्टया ठंड के कारण उसकी हालत गंभीर प्रतीत हो रही थी। युवकों ने आसपास से कूड़ा-बीन कर आग जलाकर नंदी को गर्मी देने की व्यवस्था की। लगभग आधे घंटे बाद नंदी कुछ शांत हुई, लेकिन स्थिति चिंताजनक बनी रही।
मवेशी अस्पताल के चिकित्सक ने मदद के बजाय युवक को डांट कर भगाया
इसके बाद युवकों ने पशु चिकित्सकीय सहायता के लिए टोल फ्री नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन काल नहीं लग सका। मजबूरी में वे पास ही स्थित सरकारी मवेशी अस्पताल पहुंचे और वहां मौजूद चिकित्सक डा. रंजीत कुमार से नंदी की हालत बताते हुए मौके पर चलकर देखने का अनुरोध किया। प्रिंस कुमार ने बताया कि कि उक्त चिकित्सक ने सहायता देने के बजाय यह कहते हुए उन्हें फटकार लगाई कि आप किसकी इजाजत से कैंपस में प्रवेश कर गए? इस पर युवकों ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि नंदी अस्पताल गेट से कुछ ही दूरी पर तड़प रहा है और समय रहते इलाज मिलने पर उसकी जान बच सकती है, लेकिन वे मौके पर जाने को तैयार नहीं हुए। इलाज के अभाव में लगभग एक घंटे बाद नंदी ने दम तोड़ दिया, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
सिंहेश्वर मवेशी अस्पताल के गेट के सामने तड़पते हुए नंदी की गई जान
इधर, पशु चिकित्सक डा. रंजीत कुमार ने कहा कि हम लोग रोज कैंप में रहने की वजह से देर से लौटते हैं। युवकों की बातचीत करने का तरीका सही नहीं था। बाद में मैंने गाय के इलाज की दवा भी बताई थी, लेकिन संभवतः पशु को जहर दिया गया था, इसी कारण मौत हुई है। वहीं स्थानीय युवक प्रिंस कुमार ने बताया कि उनके पास पूरी घटना का वीडियो साक्ष्य मौजूद है। यह वीडियो अनुमंडल पदाधिकारी के साथ-साथ उप विकास आयुक्त और जिलाधिकारी को भी भेजा गया है, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते चिकित्सक मौके पर पहुंचकर प्राथमिक उपचार करते तो एक बेजुबान गोवंश की जान बचाई जा सकती थी। यह घटना सरकारी पशु चिकित्सा व्यवस्था की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ी करती है। |
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