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बापू सभागार की रामलीला ने जीता कृष्‍ण भक्‍त तेज प्रताप यादव का दिल; रामायण पर की बड़ी टिप्पणी

deltin33 1 hour(s) ago views 353
  

फिल्‍म अभिनेता आशुतोष राणा के साथ तेज प्रताप यादव। एक्‍स  



डिजिटल डेस्क, पटना। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव अपनी धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक रुझान को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं।

भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त माने जाने वाले तेज प्रताप वृंदावन-मथुरा में दर्शन-पूजन से लेकर स्वयं कृष्ण का वेश धारण कर बांसुरी बजाते हुए कई बार नजर आ चुके हैं। वे स्वयं को कृष्ण और अपने छोटे भाई, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को अर्जुन बताते रहे हैं।

अब तेज प्रताप यादव मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों से भी गहराई से प्रभावित नजर आ रहे हैं। उन्होंने रामायण को सत्य, धर्म, कर्तव्यनिष्ठा, त्याग और मर्यादा की सीख देने वाला महान ग्रंथ बताया है।

उनके अनुसार रामायण न केवल एक धार्मिक ग्रंथ है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने वाला नैतिक और सामाजिक मार्गदर्शक भी है।

तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए जानकारी दी कि पटना के बापू सभागार में “हमारे राम” नामक एक भव्य रामलीला का आयोजन किया गया।

इस मंचन में प्रसिद्ध अभिनेता आशुतोष राणा (Bollywood Actor Ashutosh Rana) ने रावण की भूमिका निभाई, जबकि राहुल भुचर राम के किरदार में नजर आए।

  
रामायण का मंचन आध्‍यात्‍मि‍क चेतना जागृत करने वाला

तेज प्रताप ने इस आयोजन को रामायण के अनकहे अध्यायों का भव्य, भावनात्मक और प्रभावशाली मंच प्रदर्शन बताया।उन्होंने लिखा कि इस आयोजन में शामिल होकर उन्होंने सभी कलाकारों से मुलाकात की और उनकी उत्कृष्ट कलाकारी के लिए उन्हें ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

तेज प्रताप के अनुसार यह प्रस्तुति न केवल मनोरंजक थी, बल्कि आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने वाली भी रही। अपनी पोस्ट में तेज प्रताप यादव ने रामायण को एक अद्भुत, अविस्मरणीय और हृदयस्पर्शी ग्रंथ बताया।

उन्होंने कहा कि रामायण प्रभु श्रीराम और रावण जैसे पात्रों के चरित्रों को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर देती है। इससे यह संदेश मिलता है कि अंततः बुराई पर अच्छाई की जीत होती है।

तेज प्रताप ने आगे कहा कि रामायण हमें माता-पिता के सम्मान, भाईचारे, अनुशासन, अच्छे आचरण और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की सीख देती है। उनके अनुसार इन नैतिक मूल्यों को अपनाकर जीवन को आदर्श और समाज को बेहतर बनाया जा सकता है।

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