वाराणसी में गंगा की रेत पर कलाकारों ने बिखेरी कला, अद्भुत कृतियों का प्रदर्शन।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी में गंगा पार की रेत में आकृति की खोज की कड़ी में सैंड कलाकारों की कला से गंगा का तट सोमवार को निहाल रहा। 24वां वार्षिक कार्यक्रम सोमवार को रविदास घाट के उस पार माँ गंगा के तट पर बालू की बनी कलाकृतियां निखरती रहीं।
गुरु राम छाटपार के 82 वें जन्म दिवस के अवसर पर सोमवार को \“राम छाटपार शिल्पन्यास\“ द्वारा भारत माँ गंगा की रेत पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम सुबह 10 बजे से सायं चार बजे तक \“रविदास घाट\“ के उस पार माँ गंगा के तट पर स्थित विस्तृत रेत के टापू पर आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम के लिए नाव की व्यवस्था रविदास घाट से की गई। प्रतिवर्ष लगभग 400-500 प्रतिभागी कलाकार रेत पर नवीन प्रयोगात्मक एवं स्वतंत्र मूर्तिशिल्प का सृजन करते हैं, जो अपने आप में रोमांचक एवं चुनौतीपूर्ण होता है। इस कार्यक्रम में स्थानीय एवं देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों को अपनी कला-दक्षता प्रदर्शित करने का अद्भुत अवसर प्राप्त होता है।
\“राम छाटपार शिल्पन्यास\“ की स्थापना 1989 में गुरु राम छाटपार (आधुनिक मूर्तिशिल्पी) की स्मृति में उनके छात्रों और मित्रों के सहयोग से की गई थी। इस न्यास के अध्यक्ष पद्मश्री स्वर्गीय प्रो. शंखो चौधुरी (वरिष्ठ मूर्तिकार) हैं। गुरु राम छाटपार के कला में समर्पण की भावना से प्रेरित होकर यह संस्था आधुनिक एवं समकालीन मूर्तिकला के क्षेत्र में नवीन प्रयोगों को लेकर समर्पित है।
पिछले 35 वर्षों से यह संस्था राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है और इसने अच्छी खासी ख्याति प्राप्त की है। शिल्पन्यास जल्द ही एक “अंतर्राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय“ की कार्य योजना में भी समर्पित है। \“रेत पर आकृति की खोज\“ में विशेष रूप से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के ललित कला के छात्रों एवं गोरखपुर, आजमगढ़, लखनऊ, इलाहाबाद आदि के अलावा देश के विभिन्न ललित कला के छात्रों तथा शहर के कला प्रेमियों की भागीदारी होती है। |
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