नोएडा सेक्टर 150 में हुई घटना में युवराज मेहता की मौत होने के चार दिन बाद एनडीआरएफ की टीम ने कार को ढूंढने का काम शुरू किया। इस दौरान पानी में उतरते के लिए तैयार गोताखोर। उस दिन भी यही संसाधन मौजूद थे। सौरभ राय
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। चार दिन पहले जिन संसाधनों के होते हुए एसडीआरएफ, दमकल और पुलिसकर्मी दो घंटे पानी में कार की छत पर जान बचाने की गुहार लगा रहे इंजीनियर युवराज मेहता को नहीं बचा सके थे। मंगलवार को उन्हीं संसाधनों का इस्तेमाल करके गाजियाबाद से आई एनडीआरएफ की टीम ने चार दिन से 30 फीट गहरे पानी में पड़ी इंजीनियर की कार रेस्क्यू ऑपरेशन कर निकाल ली। इससे पता चलता है कि घटना के दिन बचाव दल में शामिल प्रशिक्षित कर्मियों का किस तरह अमानवीय और कर्तव्य के प्रति किस तरह गैर जिम्मेदाराना रवैया रहा होगा।
उस रात भी बोट थी और रस्सा भी था मौजूद
घटना के दिन यानी शुक्रवार रात करीब 12 बजे इंजीनियर युवराज मेहता कार समेत सेक्टर-150 स्थित माल के निर्माणाधीन बेसमेंट में भरे पानी में गिरा था। कुछ देर बाद पुलिस, दमकल कर्मी और एसडीआरएफ की टीम भी पहुंच गई थी। मौके पर बोट, हाइड्रा, रस्सा, लाइफ जैकेट, सर्च लाइट, ट्यूब समेत सारे संसाधन मौजूद थे, लेकिन ठंडे पानी, झाड़ियां और निर्माणाधीन बेसमेंट के पिलर की सरिया से करीब दो घंटे बाद भी बचाव दल का कोई कर्मचारी महज 70 फीट की दूरी पर पानी में कार की छत पर लेटे युवराज को बचाने नहीं पहुंचे थे।
कार बाहर निकालने में लगा दिये तीन दिन
बाद में गाजियाबाद से पहुंची एनडीआरएफ की टीम ने करीब दो घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन कर युवराज को निकाल लिया था, लेकिन तब तक काफी देर हाे चुकी थी। मंगलवार को भी गाजियाबाद से पहुंची एनडीआरएफ की टीम ने इंजीनियर की कार बाहर निकालने में बोट और रस्सा का ही प्रयोग किया। हालांकि कार 30 फीट अंदर डूबी थी, इसलिए उसकी लोकेशन पता करने के लिए सोनार मशीन का उपयोग किया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन सुबह 11.45 बजे शुरू हुआ था, जो सात घंटे बाद शाम करीब 6.45 बजे बाहर निकाल ली गई।
यह भी पढ़ें- उस रात NDRF डूबते इंजीनियर युवराज के लिए जुटा न सकी एक रस्सी, अब अफसरों की सुरक्षा में बिछाया रस्सियों का जाल
सोनार मशीन से नहीं मिली कार की लोकेशन
रेस्क्यू आपरेशन में सबसे पहली लखनऊ से मंगाई गई सोनार मशीन लेकर दो गोताखोर पानी में उतरे। कार डूबने के अनुमानित एरिया के आसपास प्रयास के बाद भी सोनार मशीन से कार की लोकेशन नहीं पता चली। फिर दो बोट पर 11 एनडीआरएफ कर्मियों ने देशी कांटा से कार की तलाश शुरू की। सफलता नहीं मिलने पर आक्सीजन सिलिंडर के साथ दो गोताखोरों को उतारा गया।
लोकेशन ने भी खूब छकाया
करीब ढाई घंटे मशक्कत के दोपहर करीब ढाई बजे टीम ने एक लोकेशन पर कार लोकेट की। गोताखोर नीचे उतरे रस्सी से कुछ बांधा और हाइड्रा व बोट के सहारे खींचने का प्रयास शुरू किया गया। करीब दो घंटे बाद पता चला कि जिसे लोकेट किया गया था वह कार नहीं थी कुछ और था, क्या था यह नहीं बताया गया।
नोएडा सेक्टर 150 में पानी में डूबी मृतक युवराज मेहता की कार को एनडीआरएफ की टीम ने निकाला। सौरभ राय
चार गोताखोरों को एक साथ उतारा तब मिली कार
लगभग साढ़े चार बजे अधिकारियों ने चार गोताखोरों को एक साथ उतारा। दो-दो की टीम में अलग-अलग स्थान पर सर्च किया गया। छह बजे कार की सटीक लोकेशन मिली। गोताखोंरो ने रस्सा बांधकर 45 मिनट में हाइड्रा से कार निकाल ली। कार के अंदर पानी और मलबा व झाड़ियां फंसी थी। इसके बाद कार को ट्रक में रखकर पुलिस ने कब्जे में ले लिया।
सात घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन पर उठे सवाल
गाजियाबाद की एनडीआरएफ की टीम ने घटना के दिन करीब दो घंटे में ही रेस्क्यू कर इंजीनियर युवराज मेहता को बाहर निकाल लिया था। जबकि मंगलवार को सात घंटे कार की तलाश की जाती रही। जबकि उस दिन कार के पास की युवराज मिला था। कार इतनी वजन थी कि उसी जहग पर मलबे में दब गई थी। ऐसे में कार की लोकेशन तलाशने में इतना समय लगना कई सवाल खड़े करता है।
कार निकालने में इन संसाधनों का उपयोग
गाजियाबाद से आई एनडीआरएफ टीम ने लखनऊ से मंगाई सोनार मशीन, दो बड़े और दो छोटे हाइड्रा, दो मोटर बोट, ऑक्सीजन सिलिंडर, देशी कांटा, रस्सी, लाइफ जैकेट, रस्सा का रेस्क्यू ऑपरेशन में उपयोग किया।
एक नजर टाइमलाइन पर...
- गाजियाबाद से एनडीआरएफ टीम ने पहुंच कर तैयारियां शुरू की- 10 बजे
- सर्च आपरेशन दो बोट पर एनडीआरएफ टीम पानी में उतरी-11.45 बजे
- एनडीआरएफ कर्मियों ने एक लोकेशन लोकेट की- 2.30 बजे
- लोकेट की लोकेशन पर कुछ और होने की जानकारी- 4.30 बजे
- चार गोताखोर एक साथ उतारे गए- 4.35 बजे
- गाड़ी की सटीक लोकेशन पता चली-6. बजे
- हाइड्रा से गाड़ी बाहर निकाली गई-6.45 बजे
- कार निकालने रेस्क्यू ऑपरेशन चला- कुल सात घंटे
तीस मिनट रही एसआईटी की टीम
घटनास्थल पर जांच के लिए गठित एसआईटी की टीम 3.30 बजे पहुंची थी। 28 मिनट घटनास्थल पर रुकी। वहां से निकल कर दो मिनट मीडिया कर्मियों से बात कर रवाना हो गई।
यह भी पढ़ें- इंजीनियर युवराज की मौत से टूटी प्राधिकरण की नींद, ग्रेटर नोएडा में जांच रहे सड़क सुरक्षा; 48 संवेदनशील जगहों की पहचान |
|