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Diwali 2025 Kab Hai: कब है कार्तिक अमावस्या? अभी नोट करें तिथि और मां लक्ष्मी की पूजा का समय

LHC0088 2025-10-8 20:18:47 views 1254
  दीवाली पर कब करें मां लक्ष्मी की पूजा





धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कार्तिक अमावस्या (Kartik Amavasya 2025) के दिन ही दीवाली का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीवाली का पर्व कार्तिक अमावस्या के दिन भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण 14 वर्ष का वनवास काटने के बाद अयोध्या आने की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन नगरवासियों ने दीपक जलाकर प्रभु का स्वागत किया था। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस अवसर पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी लक्ष्मी की उपासना करने से भक्त का जीवन खुशियों से भर जाता है। ऐसे में चलिए जानते हैं दिवाली की डेट( Kab Hai Diwali 2025) और पूजा का शुभ मुहूर्त के बारे में।


दीवाली 2025 डेट और Time (Diwali 2025 Date and Time)



वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार दीवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। कार्तिक माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 20 अक्टूबर को 03 बजकर 44 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 21 अक्टूबर को 05 बजकर 54 पर होगा।
दीवाली 2025 शुभ मुहूर्त (Diwali 2025 Shubh Muhurat)



दीवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने का शुभ मुहूर्त शाम को 07 बजकर 08 मिनट से 08 बजकर 18 मिनट तक है।  





ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 44 मिनट से 05 बजकर 34 मिनट तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 01 बजकर 59 मिनट से 02 बजकर 45 मिनट तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 05 बजकर 46 मिनट से 06 बजकर 12 मिनट तक

निशिता मुहूर्त: 21 अक्टूबर को रात 11 बजकर से 41 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक
बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा





अगर आप दीवाली के दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो पूजा के समय मां लक्ष्मी को कमल का फूल चढ़ाएं। ऐसा माना जाता है कि इस उपाय को करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।


आर्थिक तंगी होगी दूर



आर्थिक तंगी से छुटकारा पाने के लिए दीवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करें। इस दौरान मां लक्ष्मी को कौड़ी अर्पित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से धन में वृद्धि होती है और आर्थिक तंगी दूर होती है।
मां लक्ष्मी के मंत्र

1. या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।

या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥



या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।

सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥

2. ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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