बिहार के कटिहार स्थित जंगल में बनी इसी झोपड़ी से पकड़ा गया था भरत यादव व निखिल। सौ. पुलिस सूत्र
जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली। बाहरी दिल्ली में रचना यादव हत्याकांड मामले में गिरफ्तार मुख्य साजिशकर्ता भरत यादव ने रचना की हत्या से पहले ही बिहार के कटिहार स्थित जंगल में अपना ठिकाना बना लिया था। फसलों व झाड़ियों के बीच बनी झोंपड़ी में रहते हुए भरत ने रचना की हत्या की साजिश रची।
बताया गया कि उसने वहीं से शूटर निखिल से संपर्क कर रचना की हत्या करने की बात कही थी। निखिल भी इसके लिए तैयार हो गया, फिर निखिल ने अपने दोस्त सुमित के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम देकर फरार हो गया।
वहीं, गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान निखिल ने पुलिस को बताया कि हत्या वाले दिन भरत यादव भलस्वा गांव में अपनी कार में बैठा था। प्लान के मुताबिक, वह रचना के सिर में गोली मारने के बाद सुमित के साथ बाइक पर सीधा भलस्वा गांव पहुंचा था। फिर वहां से भरत यादव के साथ कार में बैठकर बिहार के लिए निकल गया। बीच-बीच में वह कई जगह होटलों में रुका भी।
जानकारी के अनुसार, उसका दोस्त सुमित हत्या में शामिल बाइक से सीधा रोहिणी हेलीपोर्ट रोड पहुंचा। जहां चोरी की यामहा बाइक फेंककर वहां से किसी और वाहन से पानीपत स्थित अपने घर फरार हो गया था।
इस मामले में शामिल एक जांच अधिकारी ने बताया कि वहीं बैठा दोनों आरोपी मीडिया चैनलों पर इस केस से जुड़ी एक-एक खबर पर नजर रख रहा था। जब इन्हें यह पता चला कि पुलिस अब इनकी तलाश कई राज्यों में कर रही है, तो भरत निखिल के साथ यहां से नेपाल भागने की फिराक में था, लेकिन इससे पहले पुलिस ने इन्हें दबोच लिया।
हत्या के बाद पिस्टल जमीन में दबाकर फरार हुआ था निखिल
पूछताछ के बाद निखिल की निशानदेही पर पुलिस ने दिल्ली के एक इलाके से जमीन में दबाए, पिस्टल भी बरामद कर ली है। निखिल ने बताया कि हत्या करने के बाद वह शालीमार बाग से भलस्वा डेरी गावं में पहुंचने से पहले ही एक सुनसान जगह पर पिस्टल जमीन में दबा दी थी। पूछताछ के दौरान निखिल ने पुलिस को बताया कि यह पिस्टल भरत ने दिल्ली में आने के बाद उसे दिया था। पुलिस जांच में पता चला कि भरत ने यह हथियार काफी समय पहले किसी से खरीदी। पुलिस उसकी भी जानकारी जुटा रही है।
आजादपुर मंडी में हुई थी सब्जी विक्रेता से दोस्ती
भरत यादव कटिहार कैसे पहुंचा, जब पुलिस ने इसकी जानकारी ली तो पता चला कि भरत की दोस्ती आजादपुर मंडी में काम करने वाले एक सब्जी विक्रेता से हुई थी। जिसका घर कटिहार में है। उसने ही कटिहार स्थित जंगल में भरत यादव की झोपड़ी बनवाने में मदद की थी। जिसमें यह काफी समय से रहता था।
दो सालों में 900 नंबरों से हुई थी भरत यादव की बात
उत्तरी-पश्चिमी जिला स्पेशल स्टाफ इंस्पेक्टर सोमवीर सिंह व उनकी टीम ने आरोपितों का पता लगाने के 900 नंबरों की जांच की। भरत यादव के रिश्तेदारों, दोस्तों और जानकारों से हुए बातों से टीम ने कड़ी दर कड़ी जोरी। इस दौरान उत्तर प्रदेश के गोंडा का एक लिंक मिला, जिससे भरत यादव लगातार टच में था। गोंडा के लिंक से बिहार का लिंक मिला, जिसके बाद सभी पकड़े गए।
विजेंद्र यादव की हत्या के बाद से ही था फरार
रचना के पति विजेंद्र यादव की हत्या के बाद से फरार भरत हरियाणा के कुछ इलाके में छिपकर रहा। फिर उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर रहने के बाद फिर वह बिहार के कटिहार में अपना ठिकाना बना लिया। यहां से वह कभी-कभी नेपाल भी चला जाता था। बीच में कई बार दिल्ली और पानीपत का भी चक्कर लगाता था। अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी मिलने आता था। कोर्ट ने इसे भगोड़ा घोषित कर दिया था।
गौरतबल है कि जमीनी विवाद में भरत यादव ने पहले विजेंद्र यादव की वर्ष 2023 में हत्या करवाई थी। फिर इस केस में गवाह विजेंद्र की पत्नी रचना की हत्या 10 जनवरी को शालीमार बाग स्थित उनके घर के पास करवा दी थी। |