कांग्रेस विधायक मंत्रियों के खिलाफ शिकायत करने आलाकमान के पास पहुंचे।
राज्य ब्यूरो, रांची। Jharkhand Politics कांग्रेस के भीतर चल रहा अंतर्विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी में अनुशासन और समन्वय की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रभारी तमाम कोशिशों के बावजूद विधायकों के बीच उपजे विवाद को सुलझा पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि विधायक बार-बार मंत्रियों के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा लेकर दिल्ली दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं। इससे न केवल संगठनात्मक असहजता बढ़ी है, बल्कि पार्टी के भीतर गहरे होते मतभेद भी सतह पर आ गए हैं।
कांग्रेस विधायकों का एक धड़ा लगातार मंत्रियों पर कामकाज में लापरवाही और विधायकों की अनदेखी करने का आरोप लगा रहा है। इन शिकायतों को लेकर विधायक सीधे पार्टी आलाकमान तक पहुंच रहे हैं।
बार-बार दिल्ली जाकर अपनी बात रखने से यह संकेत साफ है कि राज्य स्तर पर समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ चुकी हैं। प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि वे विधायकों और मंत्रियों के बीच संतुलन बनाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं।
मंत्री पद को लेकर पुराना विवाद, इस बार ज्यादा जटिल
कांग्रेस में मंत्री पद को लेकर पहले भी कूद-फांद और असंतोष देखने को मिला है, लेकिन इस बार स्थिति कहीं अधिक जटिल मानी जा रही है। पार्टी के भीतर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज है और विधायक खुलकर मंत्रियों की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।
कुछ विधायकों का कहना है कि मंत्री अपने पद का रुतबा दिखाते हुए विधायकों की बातों को गंभीरता से नहीं लेते, जिससे क्षेत्रीय समस्याएं अनसुनी रह जाती हैं।
आलाकमान का हस्तक्षेप, समाधान की कोशिश
Jharkhand Congress पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अब कांग्रेस आलाकमान ने सीधे हस्तक्षेप किया है। बताया जा रहा है कि एक बार फिर से सभी विधायकों से अलग-अलग बातचीत कर उनकी नाराजगी और शिकायतों को समझने का टास्क सौंपा गया है।
नेतृत्व का प्रयास है कि व्यक्तिगत संवाद के जरिए असंतोष को कम किया जाए और संगठन में एकजुटता बहाल हो। हालांकि, यह राह आसान नहीं मानी जा रही, क्योंकि नाराजगी अब सार्वजनिक बयानबाजी तक पहुंच चुकी है।
मंत्रियों को हटाने की मांग पर अड़े विधायक
उधर, दिल्ली में मंत्रियों को हटाने की मांग को लेकर डटे कुछ विधायक शुक्रवार को रांची लौट आए। इन विधायकों ने कांग्रेस कोटे के चारों मंत्रियों को नाकाबिल करार देते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग दोहराई है।
उनका आरोप है कि मंत्री न तो संगठन को साथ लेकर चल रहे हैं और न ही विधायकों की समस्याओं पर ध्यान दे रहे हैं। कांग्रेस विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप ने साफ शब्दों में कहा कि मंत्री सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मंत्रियों को यह समझना होगा कि वे भी विधायक ही हैं, कोई स्पेशल नहीं हैं। जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें विधायकों की बात सुननी चाहिए। वहीं, विधायक सुरेश बैठा ने कहा कि उनकी बातें आलाकमान द्वारा गंभीरता से सुनी गई हैं।
मंत्री विधायकों की बातों को करते हैं नजरअंदाज
जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा। उनका आरोप है कि मंत्री विधायकों की बातों को नजरअंदाज करते हैं।
संगठन पर असर और आगे की राह कांग्रेस में जारी इस कलह का सीधा असर संगठन की छवि और कार्यक्षमता पर पड़ रहा है।
विपक्ष को भी सरकार और संगठन पर हमला बोलने का मौका मिल रहा है। ऐसे में आलाकमान के लिए यह चुनौती है कि वह जल्द से जल्द ठोस समाधान निकालकर अनुशासन कायम करे।
यदि समय रहते स्थिति नहीं संभली तो यह अंतर्विरोध पार्टी के लिए आने वाले समय में और बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। |
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