DG Propulsion 3D Printed Jet Engine: भारत अब जेट इंजन बनाने में एक नई क्रांति की ओर बढ़ रहा है. भारतीय एयरोस्पेस स्टार्टअप DG Propulsion ने एक ऐसा कमाल कर दिखाया है जो देश के इंजन निर्माण को पूरी तरह बदल सकता है. कंपनी ने हाल ही में एक नया 3D प्रिंटेड कोर इंजन मॉड्यूल तैयार किया है, जो अब तक के बाकी डिजाइन से बिल्कुल अलग है. खास बात यह है कि पहले जहां इस इंजन के लिए 9 अलग-अलग पार्ट्स को जोड़ना पड़ता था, वहीं अब इसे एक ही पार्ट में तैयार कर दिया गया है.
3D प्रिंटिंग से बना सिंगल पार्ट इंजन मॉड्यूल
DG Propulsion के संस्थापक प्रतीक धवन ने 21 अक्टूबर को इस उपलब्धि की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की है. उन्होंने बताया कि यह नया इंजन मॉड्यूल पूरी तरह मेटल 3D प्रिंटिंग तकनीक से बना है, जिससे उत्पादन का समय 40% तक कम हुआ है. इतना ही नहीं, इससे इंजन का वजन भी 15-20% हल्का हो गया है और लागत में 30-50% की बचत हुई है.
यह इंजन मॉड्यूल छोटे जेट इंजन जैसे टर्बोजेट या टर्बोफैन के कोर हिस्से (कंप्रेसर या डिफ्यूजर सेक्शन) के रूप में काम करता है. पहले इन्हें बनाने में कई हिस्सों को जोड़ना पड़ता था, जिनके बीच वेल्डिंग होती थी. यही वेल्डिंग समय के साथ थर्मल फटीग की वजह बनती थी. लेकिन DG Propulsion का यह नया डिजाइन वेल्ड-फ्री है, जो अधिक मजबूत और टिकाऊ है.
नई तकनीक से बनेगा हल्का और ताकतवर इंजन
यह मॉड्यूल इनकनेल 718 या टाइटेनियम जैसी मजबूत धातुओं से 3D प्रिंट किया गया है. इसके अंदर हीट-डिसिपेशन लैटिस स्ट्रक्चर और कूलिंग चैनल्स भी बनाए गए हैं, जिससे यह इंजन ज्यादा गर्म हुए बिना बेहतर प्रदर्शन कर सकता है. कंपनी का दावा है कि यह नया डिजाइन न केवल इंजन की लाइफ को दोगुना करेगा, बल्कि भारतीय UAVs और मिसाइलों जैसे CATS Warrior या Nirbhay में भी इसे फिट किया जा सकेगा.

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
DG Propulsion को 2024 में DRDO के Innovations for Defence Excellence (iDEX) प्रोग्राम के तहत फंडिंग मिली थी. कंपनी का टारगेट है कि भारत में ही इंडिजिनस टर्बोजेट इंजन तैयार किए जाएं, जो ड्रोन्स और क्रूज़ मिसाइलों को शक्ति दे सकें.
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