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Narmada Jayanti 2026: रथ सप्तमी-नर्मदा जयंती आज, इस विधि से करें पूजा, मिलेगा सुख-शांति का आशीर्वाद

deltin33 2026-1-25 09:56:42 views 930
  

Narmada Jayanti 2026: रथ सप्तमी-नर्मदा जयंती का महत्व।



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में माघ महीने का विशेष महत्व है। इस साल माघ शुक्ल सप्तमी एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग लेकर आई है। इस दिन जहां एक ओर रथ सप्तमी (Ratha Saptami 2026) मनाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर मोक्षदायिनी मां नर्मदा का प्राकट्य दिवस यानी नर्मदा जयंती (Narmada Jayanti 2026) भी है। अग्नि और जल की एक साथ पूजा करने का यह \“शुभ संयोग\“ भक्तों के लिए आरोग्‍य, सुख और शांति का आशीर्वाद लेकर आया है, तो आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं।

  
महत्व (Rath Saptami-Narmada Jayanti Significance)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथ सप्तमी को अचला सप्तमी भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव ने अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर पूरे ब्रह्मांड को अपना आशीर्वाद देते हैं। वहीं, मां नर्मदा एकमात्र ऐसी नदी हैं, जिनकी परिक्रमा की जाती है और जिनके दर्शन मात्र से सभी पापों का नाश हो जाता है। जब यह दोनों पर्व एक साथ हो तो दान, स्नान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
सूर्य पूजन विधि (Puja Rituals)

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। अगर हो पाए तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, वरना घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल या नर्मदा जल और तिल मिलाकर स्नान करें।
  • स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, लाल फूल, अक्षत और गुड़ डालें।
  • अपने हाथों को सिर से ऊपर उठाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • अर्घ्य देते समय“ॐ घृणि सूर्याय नमः“ का जाप करें।
  • इसके बाद वहीं, खड़े होकर सूर्य की तीन बार परिक्रमा करें।
  • आरती से पूजा को समाप्त करें।

नर्मदा पूजन विधि (Puja Vidhi)

  • मां नर्मदा की प्रतिमा स्थापित करें या शिवलिंग का जलाभिषेक करें।
  • उन्हें सिंदूर, फूल और हलवा, खीर आदि अर्पित करें।
  • नर्मदा जयंती पर दीप दान का विशेष महत्व है।
  • शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर और तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं।
  • अगर आप नदी के किनारे हैं, तो आटे के 11 दीप जलाकर नदी में प्रवाहित करें।
  • पूजा के समय “त्वदीय पाद पंकजम, नमामि देवी नर्मदे“ का जाप करें।
  • अंत में आरती कर पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।

करें ये दान (Daan List)

इस शुभ संयोग पर की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती। सूर्य पूजन से कुंडली के दोष दूर होते हैं और आरोग्‍य व तेज की प्राप्ति होती है। वहीं, मां नर्मदा की पूजा से मानसिक शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन अपनी क्षमता अनुसार किसी जरूरतमंद को गेहूं, गुड़, तांबा या लाल वस्त्र का दान जरूर करें। इससे जीवन के सभी दुख-दर्द का नाश होता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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