search
 Forgot password?
 Register now
search

दुलकर सलमान और अमाल सूफिया से सीखें माइंडफुल पेरेंटिंग, सिखाते हैं बिजी करियर और परवरिश के बीच सही तालमेल

LHC0088 1 hour(s) ago views 883
  

सलमान दुलकर और अमाल सुफिया से जानें पेरेंटिंग टिप्स (Picture Courtesy: Instagram)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिजी करियर और पेरेंटिंग के बीच ताल-मेल बिठाना अक्सर मुश्किल होता है। लेकिन साऊथ के सुपरस्टार दुलकर सलमान और उनकी पत्नी अमाल सूफिया आज के दौर के माता-पिता के लिए एक मिसाल पेश कर रहे हैं।  

अपनी चमक-धमक वाली दुनिया से दूर, यह कपल अपनी बेटी मरियम अमीराह सलमान को बहुत ही सादे और जमीन से जुड़े तरीके से बड़ा कर रहा है। आइए जानते हैं उनकी पेरेंटिंग के वो राज, जो उन्हें \“रोल मॉडल\“ बनाते हैं।
सामान्य बचपन

एक पैन-इंडिया स्टार होने के बावजूद, दुलकर अपनी बेटी को नॉर्मल अनुभव देना पसंद करते हैं। घर के छोटे-मोटे काम, आपसी बातचीत और परिवार के साथ बिताया गया समय उनके जीवन का अहम हिस्सा है। वे अपनी बेटी में बुनियादी मूल्यों को विकसित करने पर जोर देते हैं, न कि सेलेब्रिटी स्टेटस का फायदा उठाने पर।

  

(Picture Courtesy: Facebook)
प्राइवेसी को महत्व

दुलकर और अमाल का मानना है कि बचपन किसी कैमरे की निगरानी में नहीं, बल्कि सुकून में बीतना चाहिए। सोशल मीडिया पर \“लाइक्स\“ बटोरने के बजाय, वे अपनी बेटी की प्राइवेसी को प्राथमिकता देते हैं। लाइम लाइट से दूर बच्चे अपनी गति से बढ़ते हैं, बिना इस दबाव के कि दुनिया उन्हें देख रही है।
जिज्ञासा और भावनाओं को बढ़ावा

दुलकर अपनी बेटी को अपनी भावनाओं और विचारों को खुलकर शेयर करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। वे मरियम को अपनी पसंद के लक्ष्यों के पीछे भागने के बजाय दुनिया को अपनी नजर से तलाशने की आजादी देते हैं।
मिसाल पेश करना

इस कपल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे अपनी बेटी पर नियम नहीं थोपते, बल्कि खुद उदाहरण पेश करते हैं। दुलकर और अमाल के बीच का सम्मानजनक रिश्ता और बातचीत का तरीका मरियम के लिए सीखने का जरिया बनता है। वे मानते हैं कि बच्चे निर्देशों से ज्यादा अपने माता-पिता के व्यवहार को देखकर सीखते हैं।
करियर और परवरिश के बीच बेहतरीन तालमेल

एक बिजी करियर और पेरेंटिंग के बीच संतुलन बिठाना मुश्किल होता है, लेकिन दुलकर और अमाल इसे बखूबी निभाते हैं। वे जानते हैं कि कब काम के लिए डिस्कनेक्ट होना है और कब परिवार के साथ इमोशनली जुड़ना है। उनकी यह माइंडफुल पेरेंटिंग सिखाती है कि अगर प्राथमिकताएं सही हों, तो सफलता और सुखी परिवार दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है।
यह भी पढ़ें- सिर्फ नंबरों के पीछे न भागें! स्कूल से आने के बाद बच्चे से रोज पूछें 5 सवाल, बढ़ेगा उसका कॉन्फिडेंस


यह भी पढ़ें- “मम्मी-पापा, काश आप समझ पाते...“, स्कूल स्ट्रेस के कारण टीनेजर्स को 5 बातें करती हैं परेशान
like (0)
LHC0088Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
LHC0088

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
155428

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com