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मप्र में मतदाता सूची शुद्धीकरण का काम जारी है। (प्रतीकात्मक चित्र)
डिजिटल डेस्क, भोपाल। प्रदेश में मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का दूसरा चरण गुरुवार को पूरा हो चुका है। इस प्रक्रिया के तहत मध्यप्रदेश में पहले चरण के बाद प्रारूप मतदाता सूची से 42.74 लाख नाम हटाए गए थे। इसके बाद 23 दिसंबर से 20 जनवरी तक नाम जोड़ने और हटाने के लिए दावा-आपत्ति की प्रक्रिया चली, जिसमें कुल 8.90 लाख आवेदन प्राप्त हुए।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, नाम जोड़ने के लिए 7 लाख 95 हजार 102 और नाम हटाने के लिए 95 हजार 210 आवेदन दाखिल किए गए। इस तरह मतदाता सूची में संशोधन के लिए बड़ी संख्या में दावे-आपत्तियां सामने आईं।
राजनीतिक दलों की भागीदारी सीमित
भाजपा के बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) ने नाम जोड़ने के लिए 4,291 और हटाने के लिए 7,867 आवेदन दिए। वहीं कांग्रेस के बीएलए ने नाम जोड़ने के लिए 359 और हटाने के लिए मात्र 45 आवेदन प्रस्तुत किए। जिलों में व्यक्तिगत रूप से प्राप्त आवेदनों को जोड़ने के बाद यह संख्या और बढ़ने की संभावना है।
22 साल बाद हुआ विशेष गहन पुनरीक्षण
प्रदेश में 22 वर्षों बाद मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण कराया गया है। इस दौरान 42 लाख से अधिक अपात्र मतदाताओं के नाम हटाकर प्रारूप सूची प्रकाशित की गई। इसके बाद पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने और अपात्रों के नाम हटाने के लिए आवेदन लिए गए। हालांकि, राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बीएलए के माध्यम से किए गए आवेदनों की संख्या कुल मिलाकर 12,595 ही रही।
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अधिकारियों के मुताबिक, जिलों से समेकित आंकड़े आने के बाद अगले सप्ताह तक नाम जोड़ने-हटाने की वास्तविक तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 21 फरवरी को किया जाएगा।
कांग्रेस का आरोप : आंकड़े छुपाए जा रहे
प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर आंकड़े छुपाने का आरोप लगाते हुए एसआईआर की प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका जताई है। पार्टी ने इस काम में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि यदि अनियमितता पाई गई तो जिम्मेदारी तय की जाएगी।
जीतू पटवारी ने की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात कर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि 11 लाख नाम जोड़ने और लाखों कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की शिकायतें मिली हैं। इस संबंध में जिला कांग्रेस अध्यक्षों द्वारा जिला निर्वाचन अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे गए हैं।
पटवारी ने यह भी आरोप लगाया कि नियमों के विपरीत कई जिलों में एक ही व्यक्ति द्वारा 200-200 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्तियां दर्ज कराई गईं। उन्होंने इसे बीएलओ से मिलीभगत का परिणाम बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। |
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