बीकानेर Abhayindia.com विप्र फाउंडेशन की ओर से UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 के संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन बीकानेर आगमन के दौरान उन्हें प्रस्तुत किया गया, जिसमें उक्त विनियम की प्रासंगिकता, सामाजिक प्रभाव तथा संभावित दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंताएँ व्यक्त की गईं।
ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया गया कि UGC Regulations 2026 का उद्देश्य भले ही उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर एवं भेदभाव-रहित वातावरण सुनिश्चित करना बताया गया हो, किंतु इसके कुछ प्रावधान व्यवहार में सामाजिक समरसता को प्रभावित कर सकते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी रेखांकित किया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के संरक्षण के लिए पहले से ही संविधान, आरक्षण नीति, SC/ST (Prevention of Atrocities) Act एवं विभिन्न न्यायिक निर्देशों के रूप में पर्याप्त कानून उपलब्ध हैं। ऐसे में इस प्रकार के नए, अत्यधिक जाति-केंद्रित विनियम की आवश्यकता एवं उसकी प्रासंगिकता पर पुनर्विचार आवश्यक है।

ज्ञापन में यह आशंका भी व्यक्त की गई कि उक्त विनियम अपने उद्देश्य के विपरीत जातिवाद को समाप्त करने के बजाय उसे संस्थागत स्वरूप प्रदान कर सकता है तथा फर्जी अथवा दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के माध्यम से निर्दोष व्यक्तियों को प्रताड़ित किए जाने की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं। साथ ही यह भी आग्रह किया गया कि विनियम की शब्दावली एवं संरचना सामाजिक समरसता को बढ़ाने के बजाय जातियों के मध्य दूरी, अविश्वास एवं वैर-भाव को बढ़ावा देने वाली प्रतीत होती है, जिस पर गंभीरतापूर्वक पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल द्वारा यह मांग की गई कि UGC विनियम 2026 में फर्जी शिकायतों पर दंडात्मक प्रावधान, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच तंत्र, अभियुक्त पक्ष को प्रभावी सुनवाई एवं अपील का अधिकार तथा सभी वर्गों के लिए समान दुरुपयोग-रोधी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि सामाजिक सौहार्द, संवैधानिक मूल्य एवं राष्ट्रीय एकता अक्षुण्ण रह सके।
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