search

बिहार में अब अस्पतालों में इंज्यूरी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध, पुलिस को चक्कर लगाने की जरूरत नहीं

cy520520 1 hour(s) ago views 709
  

बिहार स्वास्थ्य विभाग



केशव कुमार, मुजफ्फरपुर। चिकित्सा व कानून की जटिल गुत्थियों को सुलझाने की दिशा में बिहार में भी स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब घायलों की इंज्यूरी रिपोर्ट हो या शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, इसके लिए पुलिस व स्वजन को हफ्तों तक अस्पताल के चक्कर नहीं काटने होंगे।

राष्ट्रीय सूचना केंद्र द्वारा विकसित डिजिटल प्लेटफार्म मेडिको-लीगल एग्जामिनेशन एंड पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग सिस्टम (मेडलीएपीपीआर) के जरिए अब ये तमाम रिपोर्ट आनलाइन उपलब्ध होंगी। पुलिस व संबंधित विभाग इन रिपोर्टों को तुरंत प्राप्त कर सकेंगे, जिससे कानूनी जांच व अदालती कार्यवाही में समय की बचत होगी।

यह सिस्टम डेटा की गोपनीयता बनाए रखने व रिपोर्ट में होने वाली मानवीय त्रुटियों को कम करने में मदद करेगा। इसे धरातल पर उतारने के लिए अस्पताल प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। मेडिको-लीगल कार्य में जुटे चिकित्सकों का विशिष्ट यूजर आइडी व पासवर्ड बनाए जा रहे हैं। रिपोर्ट तैयार करने वाले चिकित्सक अब सीधे पोर्टल पर डेटा अपलोड करेंगे।

एसकेएमसीएच के अधीक्षक डा. महेश प्रसाद ने बताया इस प्रणाली से न केवल काम का बोझ कम होगा, बल्कि रिपोर्ट के साथ होने वाली छेड़छाड़ की गुंजाइश भी खत्म हो जाएगी। पुलिस केस से जुड़े मामले को जो चिकित्सक इलाज करेंगे, वह सीधे पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड करेंगे। डाक या हाथोंहाथ रिपोर्ट भेजने की प्रतीक्षा खत्म होगी। इससे समय की बचत होगी।

बताया कि यह डिजिटल प्लेटफार्म अस्पतालों व पुलिस के बीच दक्षता और समन्वय बढ़ाने का काम करेगा। चोट, आयु निर्धारण व पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने को अब पूरी तरह मानकीकृत और स्वचालित (आटोमेटेड) कर दिया गया है। पहले यह हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ में लागू था। पिछले वर्ष लद्दाख व दिल्ली में हुआ। अब बिहार में लागू किया गया है।
सीसीटीएनएस से जुड़ेगा मेडलीएपीपीआर

अपराध अनुसंधान की रफ्तार तेज करने व साक्ष्यों की सटीकता के लिए मेडलीएपीपीआर पोर्टल को अब सीधे क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स (सीसीटीएनएस) से एकीकृत किया जाएगा। इससे अब चिकित्सक द्वारा पोर्टल पर अपलोड की गई चोट व पोस्टमार्टम रिपोर्ट सीधे जांच अधिकारी के सिस्टम पर रिफ्लेक्ट होगी। पुलिस को इंज्यूरी या पोस्टमार्टम रिपोर्ट लेने के लिए अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

अधीक्षक ने बताया कि सीसीटीएनएस के साथ एकीकरण होने से पुलिस अधिकारी अपनी लागिन आइडी से सीधे रिपोर्ट डाउनलोड कर सकेंगे। यह नई व्यवस्था नए आपराधिक कानूनों (भारतीय न्याय संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के प्रविधानों के अनुरूप तैयार की गई है, जो डिजिटल साक्ष्यों को कानूनी मान्यता देता है। सीसीटीएनएस एकीकरण रियल-टाइम एक्सेस, साक्ष्यों की सुरक्षा, बेहतर समन्वय, डिजिटल आडिट ट्रेल के फायदे होंगे।
like (0)
cy520520Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
cy520520

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
156510