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AIIMS दिल्ली में फेस ट्रांसप्लांट की तैयारी पूरी, माइक्रोस्कोप की मदद से बाल से भी महीन धागों से होगी सर्जरी

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फेस ट्रांसप्लांट के लिए तैयारियां पूरी, अब सरकारी लाइसेंस लेने की प्रक्रिया शुरू की। फोटो: जागरण  



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। फेस ट्रांसप्लांट की दिशा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी पूरी कर ली है। इसके लिए अत्याधुनिक और जटिल प्रक्रिया की तैयारियों के संबंध में पांच दिवसीय बहु-विभागीय अंतरराष्ट्रीय अकादमिक प्रशिक्षण व विशेष कैडैवरिक वर्कशाॅप का आयोजन भी किया गया।

शुक्रवार को एम्स के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डाॅ. मनीष सिंघल ने बताया कि फेस ट्रांसप्लांट के लिए तकनीकीॅ, चिकित्सकीय और बहु विभागीय स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, अब सरकारी लाइसेंस लेने की विधिक प्रक्रिया शुरू की जा रही है। एम्स में हर साल एसिड बर्न के कुल मिलाकर करीब तीस तथा बर्न के तीन हजार से अधिक मरीज आते हैं।

ऐसे में फेस ट्रांसप्लांट कार्यक्रम क्षत-विक्षत चेहरों को नई पहचान, आत्मसम्मान और सामान्य जीवन लौटाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। पत्रकारवार्ता में प्लास्टिक सर्जरी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. शिवांगी शाह ने बताया कि फेस ट्रांसप्लांट में माइक्रोस्कोपिक तकनीक से बाल से भी 10 गुना महीन धागों द्वारा नसों और रक्त वाहिकाओं को जोड़ा जाता है।

हर मरीज में पूरे चेहरे का ट्रांसप्लांट आवश्यक नहीं होता, कई मामलों में केवल क्षतिग्रस्त हिस्से का ही प्रत्यारोपण किया जाता है। दाता और रिसीवर दोनों पर बैक-टू-बैक सर्जरी होती हैं, जिनमें कुल 32 से 36 घंटे लगते हैं। डोनर से फेस प्राप्त होने के दो घंटे के अंदर रिसीवर पर ट्रांसप्लांट करना होता है।

डाॅ. सिंघल ने स्पष्ट किया कि फेस ट्रांसप्लांट केवल सर्जरी नहीं, बल्कि सही मरीज का वैज्ञानिक चयन, नैतिक तैयारी और दीर्घकालिक देखभाल की प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि इसके लिए उम्र और जेंडर का मेल बेहद जरूरी होगा, महिला को महिला का और पुरुष को पुरुष का ही फेस ट्रांसप्लांट किया जाएगा।

उम्र का असंतुलन होने पर न सिर्फ परिणाम प्रभावित हो सकता है, बल्कि चेहरा स्वाभाविक भी नहीं लगेगा। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में डाॅ. मनीष सिंघल ने बताया कि इस सर्जरी में एनेस्थीसियोलाॅजी, क्रिटिकल केयर, ईएनटी, ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी, नेफ्रोलाॅजी, ट्रांसप्लांट इम्यूनोलाॅजी, पैथोलाॅजी, साइकियाट्री, एनाटामी और ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन का भी सक्रिय सहयोग रहता हैं।
एम्स की क्षमताएं वैश्विक मानकों के अनुरूप

इसके लिए एम्स चिकित्सकों को हार्वर्ड मेडिकल से संबद्ध ब्रिघम एंड विमेन्स हाॅस्पिटल के एसोसिएट चीफ ऑफ प्लास्टिक सर्जरी डाॅ. इंद्रनील सिन्हा ने प्रशिक्षण का नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका में अब तक 30 फेस ट्रांसप्लांट हो चुके हैं, जिनमें 10 उनकी टीम ने किए हैं और एम्स की क्षमताएं वैश्विक मानकों के अनुरूप हैं। बताया कि विश्व में अब तक 80 फेस ट्रांसप्लांट हुए हैं।

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