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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यह कहानी सिर्फ एक बुजुर्ग महिला के साहस की नहीं, बल्कि उस नागरिक चेतना की है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं।
मामला देश के सबसे साक्षर राज्य केरल के कोझिकोड का है, जहां एरनहिपालम इलाके के एक ट्रैफिक सिग्नल पर हुई घटना ने सबका ध्यान खींच लिया।
जाम से बचने के लिए कई दोपहिया वाहन फुटपाथ पर चढ़ गए थे, वही फुटपाथ जहां बच्चे, बुजुर्ग और कामकाजी लोग पैदल गुजरते हैं।
तभी एक बुजुर्ग महिला आगे बढ़ीं और एक स्कूटर सवार के सामने अंगद की तरह पैर जमा कर खड़ी हो गईं। उनका साफ संदेश था यह रास्ता पैदल चलने वालों के लिए है, वाहनों के लिए नहीं।
कोझिकोड में बुजुर्ग महिला ने फुटपाथ पर स्कूटर रोका
स्कूटर चालक पहले बहस करता रहा। उसने बगल से निकलने की कोशिश की, लेकिन महिला टस से मस नहीं हुईं। स्थिति बढ़ती देख उन्होंने मोबाइल निकालकर नियम तोड़ने वाले की रिकार्डिंग शुरू कर दी।
उनकी दृढ़ता के आगे चालक ज्यादा देर टिक नहीं सका और अंतत: फुटपाथ छोड़कर मुख्य सड़क पर लौट गया।वीडियो ने जीता दिलघटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।
इसे दो करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है और लाखों लोगों ने इसे पसंद किया है। कैप्शन में लिखा था जब अम्मा कहती हैं, बस अब बहुत हो गया।
वीडियो के साथ यह भी संदेश दिया गया कि फुटपाथ पर वाहन चलाना पैदल यात्रियों के लिए गंभीर खतरा है और इसे सामान्य नहीं माना जाना चाहिए।
टिप्पणियों में कई लोगों ने महिला की पहचान एक हास्टल की पूर्व अधीक्षिका \“प्रभा आंटी\“ के रूप में की। पूर्व छात्राओं ने लिखा कि वह सख्त अनुशासन के लिए जानी जाती थीं, लेकिन उतनी ही संवेदनशील भी थीं।
एक छोटा कदम, बड़ा संदेश
इंटरनेट मीडिया पर लोगों ने इसे नागरिक जिम्मेदारी का सशक्त उदाहरण बताया। कई यूजर्स ने लिखा कि गलती मान लेना मुश्किल नहीं था, लेकिन नियम तोड़ने की जिद ने चालक को छोटा बना दिया।
यह घटना याद दिलाती है कि कानून केवल किताबों में नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों के व्यवहार में जीवित रहता है।
कभी-कभी बदलाव की शुरुआत किसी बड़े आंदोलन से नहीं, बल्कि एक ²ढ़ कदम से होती है और इस बार वह कदम एक बुजुर्ग महिला ने बढ़ाया। |
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