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CM उमर अब्दुल्ला ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर फिर जताई आपत्ति, बताया घाटे का सौदा; बांग्लादेश पर क्या बोले?

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CM उमर अब्दुल्ला ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर फिर जताई आपत्ति। फाइल फोटो



राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को एक बार फिर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर एक बार फिर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे देश के अन्य भागों को होने वाले लाभ का मुझे पता नहीं,लेकिन अभी तक मुझे इसमें जम्मू कश्मीर के लिए नुक्सान ही नजर आ रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने बांग्लादेश में नयी सरकार द्वारा साथ भारत अच्छे और सौहार्दपूर्ण सबंध बनाए जाने की उम्मीद जताते हुए कहा कि एक स्थिर और शांत पड़ौसी भारत के लिए लाभजनक है।

आज यहां शेरे कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय सकास्ट के वार्षिक कृषि-प्रौद्योगिकी मोहत्सव गोंगुल का उद्घाटन करने के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि भारत-अमेरिका के बीच हुआ व्यापार समझौता अभी तक जम्मू कश्मीर के लिए घाटे का सौदा हैजिन चीज़ों को यहां ड्यूटी-फ्री आने दिया जाएगा, वे सब जम्मू-कश्मीर में पैदा होने वाली चीज़ें हैं – बादाम, अखरोट, सेब, ताज़े फल, ड्राई फ्रूट।

आप (सरकार) कह रहे हैं कि कोई असर नहीं पड़ेगा, कि जम्मू-कश्मीर के फल 70 रुपये प्रति किलो से कम में नहीं बिकेंगे। लेकिन इसका क्या मतलब है (जब आप कहते हैं) कि वे अपने अच्छे फल बेचेंगे और हम अपने खराब फल बेचेंगे?”

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बागवानी हमारी अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। स्थानीय किसानों ने अपने बागों में पैदा होने वाले फलों की गुणवत्ता को सुधारने के लिए बहुत मेहनत की है, बड़े पैमाने पर पूजी निवेश किया है,कइयों ने बैंकों से ऋण लिया है।

इससे नयी किस्मों और अच्छी गुणवत्ता वाले फल आए हैं और हम सीए स्टोर के जरिए सही समय पर फलों केा बाजार तक ले जा रहे हैं। लेकिन अब आप कहेंगे कि अच्छी और कम कीमत वाली चीजें बाहर से यहां आएंगे,यहां बिकेंगी तो यह हमारे साथ बागवानों के साथ मजाक है।

हम चाहते हैं कि हमारे अच्छे और अच्छी कीमत वाले उत्पाद आसानी से बिकें,लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है।इसलिए मुझे इस व्यापार समझौते में नुक्सान ही दिख रहा है।

मुख्यमंत्री ने जम्मू कश्मीर में किसानों के कल्याण के लिए किए जा रहे कार्याें का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी सरकार कृषि विश्वविद्याल की मदद से, किसानों तक प्रौद्योगिकी से चलने वाले आर्गेनिक सॉल्यूशन पहुंचाने की कोशिश की जा रही है ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खेती को बढ़ावा मिल सके।

उन्होंने कहा कि लाखों लोग इस महोत्सव का लाभ उठाने आ रहे हैं। हम यही चाहते हैं। अगर हमें अमेरिका जैसे देशों से मुकाबला करना है — व्यापार समझौते के बाद हमारे किसानों को अमेरिकी कृषि उत्पादों के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ेगी, क्योंकि उनके कृषि उत्पाद हमारे देश में आएंगे — तो हमें अपनी उत्पादकता और गुणवत्ता को बेहतर बनाना होगा, जिसके लिए यह महोत्सव एक अहम भूमिका निभाता है।

बांग्लादेश में नई सरकार के गठन से जुड़े सवाल पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि उसके भारत के साथ रिश्ते बेहतर होंगे।हमारे पड़ोसी देश जितने स्थिर होंगे, हमें उतना ही फायदा होगा। कोई भी युद्ध और लड़ाई नहीं चाहता, या अस्थिर पड़ोसी नहीं चाहता — चाहे वह बांग्लादेश हो, श्रीलंका हो, नेपाल हो या कोई और देश।

अब्दुल्ला ने कहा कि भारत बांग्लादेश में एक मजबूत लोकतंत्र चाहता है और चाहता है कि वहां स्थिरता हो,कानून का शासन हो और वह तरक्की करे। हमें उम्मीद है कि बांग्लादेश में सरकार बनने के बाद, दोनों देश अपने रिश्ते सुधारेंगे, जिनमें बीते कुछ समय से कुछ कड़वाहट देखी गई हैञ।
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