प्रशासन के समक्ष सामुहिक रूप से सपथ लेते अभिभावक। फोटो जागरण
जागरण संवाददाता, अनुगुल। ओडिशा के केंद्रापाड़ा जिले में एक आंगनवाड़ी केंद्र में दलित महिला की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ जातीय विवाद आखिरकार 86 दिन बाद सुलझ गया। राजनगर ब्लॉक के घड़ियामाला पंचायत अंतर्गत नुआगांव स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में पिछले तीन माह से बच्चों और महिलाओं की सेवाएं बाधित थीं।
जानकारी के अनुसार, गत 20 नवंबर 2025 को शर्मिष्ठा सेठी नामक दलित महिला को आंगनवाड़ी केंद्र में हेल्पर-कम-कुक के पद पर नियुक्त किया गया था। यह पद लंबे समय से रिक्त था और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनकी नियुक्ति की गई थी, लेकिन गांव के कुछ लोगों ने जातिगत आधार पर इसका विरोध शुरू कर दिया।
विरोध के चलते कई परिवारों ने अपने बच्चों को केंद्र भेजना बंद कर दिया। गर्भवती और धात्री महिलाओं ने भी पोषण आहार लेना बंद कर दिया।
बताया गया कि इस विवाद के कारण करीब 60 बच्चों और महिलाओं को मिलने वाली पूरक पोषण, प्री-स्कूल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं।
प्रशासन ने कराया समझौता
मामला बढ़ने पर प्रशासन हरकत में आया। स्थानीय प्रशासन, महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग के प्रतिनिधियों ने गांव में कई दौर की बैठकें कीं और लोगों को समझाया। शनिवार को आयोजित बैठक में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी।
ग्रामीणों ने लिखित रूप से आश्वासन देने के साथ सामूहिक रूप से सपथ लिया कि वे अब किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करेंगे और अपने बच्चों को नियमित रूप से आंगनवाड़ी भेजेंगे। इसके बाद केंद्र को दोबारा सुचारु रूप से खोलने का निर्णय लिया गया है।
\“जातिगत भेदभाव बर्दाश्त नहीं\“
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई है और किसी भी प्रकार के जातिगत भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही केंद्र के लिए स्थायी भवन निर्माण और सुविधाओं के विस्तार का भी आश्वासन दिया गया है।
करीब तीन महीने तक चले इस विवाद ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक समरसता की चुनौती को उजागर किया है। हालांकि प्रशासनिक पहल के बाद अब स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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