सांकेतिक तस्वीर।
संवाद सहयोगी, जागरण, रोजा। स्क्रैप कारोबार करके दो करोड़ रुपये की जीएसटी हड़पने में जिस प्रमोद के नाम पर बोगस फर्में बनाईं गईं वह फरीदाबाद में मजदूरी करता मिला। उसे इस बारे में कोई जानकारी तक नहीं थी। नौकरी के लिए आनलाइन आवेदन करके प्रपत्र दिए थे, जिनका प्रयोग मुजफ्फरनगर निवासी सुमित व उसके साथियों ने बोगस फर्म बनाने में किया।
नवंबर 2025 में जीएसटी के सचल दल ने रोजा में स्क्रैप के तीन ट्रक पकड़े थे। चालकों के पास जो ई-वे बिल मिले वो बिहार की प्रमोद इंटरप्राइजेज के नाम पर जारी थे, लेकिन जांच में फर्म फर्जी निकली।
मुजफ्फरनगर निवासी सुमित ने अपने साथियों के साथ बनाई थी एक ही नाम पर 11 फर्जी फर्में
शनिवार सुबह पु़लिस ने मुजफ्फरनगर निवासी सुमित उर्फ शिवओम, दिल्ली के अखिलेश, गाजियाबाद निवासी विपिन व शामली के राहुल राणा को सुभाष चौराहे से गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पता चला कि आरोपित 250 से अधिक ट्रकों से स्क्रैप बेचकर दो करोड़ रुपये की जीएसटी हड़प चुके हैं। यह लोग फेसबुक व इंस्टाग्राम पर नौकरी का विज्ञापन निकालते थे। फिर इंटरव्यू के लिए आधार, पैन कार्ड, फोटो आदि मांग लेते थे। इन प्रपत्र पर बोगस फर्म बना लेते थे।
फैक्ट्री में दिहाड़ी मजदूरी करता है प्रमोद
प्रमोद के नाम से 11 फर्में बनाईं गईं थीं। जब प्रमोद के बारे में जानकारी जुटाई गई तो वह फरीदाबाद की एक फैक्ट्री में दिहाड़ी मजदूरी करते हुए मिला। पुलिस को बताया कि उसने कई बार ऑनलाइन विज्ञापन देख नौकरी के लिए आवेदन किया था। पैन कार्ड, आधार कार्ड और फोटो भी दिए थे। लगभग साल भर इंतजार के बाद नौकरी नहीं मिली तो फरीदाबाद में दिहाड़ी मजदूरी करने लगा। पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश भी तेज कर दी है। |