कर्मडिहरी के पास जा रही रेल पटरी। फोटो जागरण
जागरण संवाददाता, सासाराम (रोहतास)। आने वाले दिनों में रेल कनेक्टिविटी की दृष्टि से सासाराम की अपनी एक अलग पहचान होगी। यह पहचान राष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिलेगी।
आरा-सासाराम रेलखंड पर रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए बन रहे एक आरएफओ व आरओआर के कारण जिला मुख्यालय से लगभग पांच किलोमीटर की दूसरी पर स्थित कर्मडिहरी गांव के पास दो प्लेटफार्म का सासाराम नार्थ जंक्शन बनाया जा रहा है।
इस पर लगभग सात अरब रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें रेल फ्लाई ओवर, आरओआर, जंक्शन पर पुट ब्रिज समेत अन्य कार्य शामिल हैं। यह जंक्शन वाया सोननगर-जपला व गयाजी-हावड़ा तथा पीडीडीयू- दिल्ली रेल लाइन को जोड़ने का काम करेगा।
यहां से इन रेलखंड के लिए ट्रेनों को रवाना किया जाएगा। आरएफओ का कार्य अंतिम चरण में है जबकि आरओआर के लिए भूमि अधिग्रहण कार्य अंतिम दौर में है। शेड व फुटब्रिज युक्त दोनों प्लेटफार्म सात सौ मीटर का होगा।
सासाराम-आरा रेलखंड का दोहरीकरण
साथ ही विभाग ने सासाराम-आरा रेलखंड के दोहरीकरण करने का भी निर्णय लिया है। दोहरीकरण को लेकर फाइनल लोकेशन सर्वे का कार्य लगभग पूरा हो गया है। इस लंबित योजना को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्य शुरू कर दिया गया है।
रेल मंत्रालय से दोहरीकरण की मंजूरी मिलने के बाद अब इस परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य शुरू हो चुका है। इससे आरा-सासाराम रेलखंड का दोहरीकरण होने से मेन लाइन पर बढ़ते दबाव को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
फिलहाल दानापुर-मुगलसराय मेन लाइन पर ट्रेनों की संख्या अधिक होने से कई बार परिचालन प्रभावित होता है। दोहरी लाइन बन जाने के बाद ट्रेनों को डायवर्ट करने और बेहतर प्रबंधन की क्षमता बढ़ जाएगी।
वहीं इस परियोजना का एक बड़ा लाभ चौसा थर्मल पावर प्लांट को भी मिलेगा। अभी प्लांट को कोयला लाने में काफी समय और लागत लगती है।
दोहरीकरण पूरा होने के बाद झारखंड के धनबाद क्षेत्र से आने वाले कोयले की ढुलाई और तेज तथा सुगम हो जाएगी, जिससे प्लांट की उत्पादन क्षमता पर सकारात्मक असर पड़ेगा। कारण कि दूसरी लाइन को डीएफसीसीईएल रेल लाइन से भी जोड़ा जाएगा, जो मालवाहक ट्रेनों के लिए विशेष रूप से बनी है।
जंक्शन निर्माण पर कार्य शुरू
दोहरीकरण को लेकर आरा-सासाराम रेलखंड के सासाराम स्टेशन के नॉर्थ केबिन के पास सहायक स्टेशन बनाए जाने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके अलावा लगभग सात अरब रुपये की लागत से दो रेल फ्लाईओवर, एक आरएफओ और एक आरओआर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है।
सात अरब की लागत से विकसित हो रही संरचना प्लेटफार्म संख्या एक और दो अप लाइन को जोड़ने का काम करेगी। कर्मडिहरी गांव के पास विकसित होने वाली इस संरचना का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
जानकारी के अनुसार, योजना के शुरुआती चरण में रेलवे की ओर से जमीन अधिग्रहण, पैमाइश, रूट मैप तैयार करने और बाधा वाले हिस्सों की पहचान करने का कार्य किया जा रहा है।
लगभग एक दशक से लंबित आरा-सासाराम दोहरीकरण परियोजना के शुरू हो जाने से लोगों में उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र रेल संपर्क और औद्योगिक विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। रेलवे की योजना है कि तीन साल के अंदर यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से पूरा कर लिया जाए।
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