Karnataka News: कर्नाटक सरकार ने 16 फरवरी को एक आदेश जारी किया। इसमें कर्नाटक प्लेटफॉर्म बेस्ड गिग वर्कर्स (सोशल सिक्योरिटी एंड वेलफेयर) एक्ट, 2025 के तहत एग्रीगेटर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म से वेलफेयर फीस लेना अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य के लेबर डिपार्टमेंट ने अब वेलफेयर फीस को पेमेंट का 1% तय कर दिया है। यह सेक्टर के हिसाब से तय लिमिट के अनुसार है। माना जा रहा है कि वेलफेयर फीस की सीमा 50 पैसे से ₹1.5 तक कंपनियां ग्राहकों पर डालेंगी।
वेलफेयर फीस हर ट्रांजैक्शन में गिग वर्कर को होने वाले आखिरी पेमेंट पर कैलकुलेट की जाएगी। राइड-हेलिंग सर्विस के लिए लेवी 1 प्रतिशत तय की गई है, जो टू-व्हीलर के लिए हर ट्रांजैक्शन पर 50 पैसे, थ्री-व्हीलर के लिए 75 पैसे और फोर-व्हीलर के लिए 1 रुपये तय की गई है। टू-व्हीलर से की जाने वाली खाने और किराने की डिलीवरी सर्विस के लिए फीस 1 प्रतिशत होगी, जो हर ट्रांजैक्शन पर 50 पैसे तय की गई है।
लॉजिस्टिक्स सेगमेंट में वेलफेयर फीस पेमेंट का 1% होगी, जो टू-व्हीलर के लिए 50 पैसे, थ्री-व्हीलर के लिए 75 पैसे, लाइट कमर्शियल व्हीकल के लिए 1 रुपये और हेवी कमर्शियल व्हीकल के लिए 1.50 रुपये तक लिमिट होगी। ई-मार्केटप्लेस सर्विस के लिए लेवी 1 फीसदी तय की गई है। इसमें टू-व्हीलर के लिए 50 पैसे, थ्री-व्हीलर के लिए 75 पैसे और लाइट कमर्शियल व्हीकल के लिए 1 रुपये की लिमिट है। प्रोफेशनल एक्टिविटी प्रोवाइडर पर 1 फीसदी लेवी लगेगी, जो हर ट्रांजैक्शन पर 1.50 रुपये तक लिमिट होगी।
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ये रेट तुरंत प्रभाव से लागू होंगे। एक्ट के सेक्शन 20 के तहत हर ट्रांजैक्शन पर गिग वर्कर्स को किए गए पेमेंट का 1 फीसदी से 5 परसेंट तक \“प्लेटफॉर्म बेस्ड गिग वर्कर्स वेलफैयर फीस\“ लगाई जा सकती है। इस कदम का मकसद गिग और प्लेटफॉ वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स देना और वेलफेयर स्कीम्स को फाइनेंस करने के लिए एक डेडिकेटेड फंड बनाना है।
सरकारी आदेश के मुताबिक, कर्नाटक में काम करने वाले और एक्ट के शेड्यूल I के तहत आने वाले सभी एग्रीगेटर्स और प्लेटफॉर्म्स को डिजिटल इंटरमीडियरीज के जरिए दी गई सर्विसेज के लिए गिग वर्कर्स को किए गए हर पेमेंट पर वेलफेयर फास काटकर भेजनी होगी।
नए कानून की बड़ी बातें
एक्ट एग्रीगेटर को एक डिजिटल इंटरमीडियरी के तौर पर डिफाइन करता है जो खरीदारों और विक्रेताओं या सर्विस प्रोवाइडर्स को जोड़ता है। इसमें एक या एक से ज्यादा एग्रीगेटर्स के साथ कोऑर्डिनेट करने वाली एंटिटीज़ भी शामिल हैं। प्लेटफॉर्म को कोई भी इलेक्ट्रॉनिक अरेंजमेंट माना जाता है जो ऑटोमेटेड या डेटा-ड्रिवन सिस्टम के ज़रिए पेड काम को ऑर्गनाइज करता है। \“पेआउट\“ का मतलब है गिग वर्कर को की गई सर्विसेज के लिए किया गया फाइनल पेमेंट। जबकि \“वेलफेयर फीस\“ का मतलब है एक्ट के सेक्शन 20(1) के तहत ली जाने वाली लेवी।
कर्नाटक प्लेटफॉर्म बेस्ड गिग वर्कर्स (सोशल सिक्योरिटी एंड वेलफेयर) रूल्स, 2025 के रूल 17 के तहत एग्रीगेटर्स को हर तिमाही के आखिर से पांच वर्किंग डेज के अंदर ऑटोमैटिकली वेलफेयर फीस कैलकुलेट करनी होगी। एक स्टैंडर्ड फॉर्मेट में रकम खुद डिक्लेयर करनी होगी और नोटिफाइड रेट्स पर उसे भेजना होगा। हालांकि, इसमें टिप्स, इवेंट-बेस्ड या स्पेशल पेमेंट, रेफरल फीस और इंसेंटिव जैसे सेटल पेमेंट वेलफेयर फीस के कैलकुलेशन से बाहर रखे गए हैं।
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इस एक्ट में एक पेमेंट एंड वेलफेयर फीस वेरिफिकेशन सिस्टम (PWFVS) का भी प्रोविजन है, जो गिग वर्कर्स को किए गए सभी पेमेंट्स को मैप करेगा। हर ट्रांजैक्शन के लिए काटी गई वेलफेयर फीस को रिकॉर्ड करेगा। गिग वर्कर लेवल पर इकट्ठा और खर्च की गई फीस की डिटेल्स बताएगा। सिस्टम को लागू सेंट्रल और स्टेट डेटा प्रोटेक्शन कानूनों का पालन करना होगा। |
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