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समस्तीपुल जिले में जीविका दीदियों ने बनाया रिकॉर्ड, 4854 स्वयं सहायता समूहों का हुआ गठन

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जीविका दीदियां बन रहीं आत्मनिर्भरता की मजबूत मिसाल



जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर जीविका दीदियां आर्थिक विकास की नई कहानी लिख रही हैं। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वयं सहायता समूहों के गठन में जिले ने लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन किया है। निर्धारित लक्ष्य 4650 समूहों के विरुद्ध जिले में कुल 4854 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की मजबूत भागीदारी:

गठित स्वयं सहायता समूहों में ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 4515 स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में 339 समूहों का गठन हुआ है। इससे यह स्पष्ट होता है कि गांव की महिलाएं अब समूह बनाकर आगे बढ़ने और आर्थिक रूप से सशक्त होने को लेकर जागरूक हो रही हैं।
बचत शाखा धारक समूहों में भी प्रगति:

चालू वित्तीय वर्ष में बचत शाखा धारक समूहों के गठन का लक्ष्य 750 रखा गया था, जिसके विरुद्ध अब तक 735 समूह गठित किए जा चुके हैं। शेष समूहों से संबंधित दस्तावेज बैंकों में जमा कर दिए गए हैं और प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
बैंकों से वित्त पोषण में 5500 समूहों को मिला ऋण:

बैंक द्वारा वित्त पोषित समूहों के मामले में जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। जहां इस वर्ष 1200 समूहों को बैंक से ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था, वहीं अब तक 5500 स्वयं सहायता समूहों को बैंक से वित्तीय सहायता मिल चुकी है। इससे महिलाओं को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में बड़ी मदद मिली है।
छोटे कार्यों से स्वरोजगार की ओर बढ़ती जीविका दीदियां:

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं बकरी पालन, मुर्गी पालन जैसे छोटे कार्यों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के स्वरोजगार से भी जुड़ रही हैं। महिलाएं अगरबत्ती निर्माण, मोमबत्ती निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई-कढ़ाई जैसे लघु उद्योगों के माध्यम से अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। कई समूह छोटे स्तर से शुरू होकर आज लाखों रुपये के कारोबार तक पहुंच चुके हैं।
जीविका मिशन से बदली महिलाओं की जिंदगी:

बिहार ग्रामीण आजीविका प्रोत्साहन समिति (जीविका) के तहत महिलाएं छोटे-छोटे समूह बनाकर नियमित बचत कर रही हैं और कम ब्याज दर पर ऋण लेकर अपने-अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं। इससे न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ा है और समाज में उनका मान-सम्मान बढ़ा है।
सरकारी योजनाओं से मिला आर्थिक संबल:

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं को स्व-रोजगार के लिए दस-दस हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई गई है। इस राशि से महिलाओं ने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू किए हैं। सरकार की ओर से आगे दो लाख रुपये तक की सहायता देने की घोषणा भी की गई है, जिसका लाभ उठाने के लिए कई उद्यमी महिलाएं प्रतीक्षारत हैं।


स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जीविका दीदियां आज न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि समाज में एक नई पहचान भी स्थापित कर रही हैं। जिले में जीविका से जुड़ी सफल महिलाओं की लंबी सूची है, जो आने वाली महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं। - विक्रांत शंकर सिंह, जिला प्रबंधक जीविका

  


यह भी पढ़ें- महिला रोजगार योजना के आवेदनों का 15 मार्च तक होगा वेरिफिकेशन, जीविका पोर्टल से होगी पूरी प्रक्रिया
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