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अपराध करके भी क्यों बरी हो जाते हैं आरोपित? गवाहों का मुकरना या कुछ और है वजह, झारखंड से आ चुके हैं कई मामले

deltin33 Yesterday 22:27 views 549
  

सबूत के अभाव में बरी हो रहे प्रत्याशी। (AI Generated Image)



राज्य ब्यूरो, रांची। हजारीबाग के कोर्ट परिसर में गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव की हत्या के आरोपित विकास तिवारी सहित सभी आरोपित बरी हो गए। यह पहला मामला नहीं है, जब किसी केस के आरोपित बरी हुए हैं।

झारखंड पुलिस ऐसे ही अन्य बड़े मामलों में आरोपितों के विरुद्ध साक्ष्य नहीं जुटा पाती, जिसका लाभ आरोपितों को मिलता है और वे कोर्ट से बरी हो जाते हैं। कई मामलों में गवाहों का मुकरना बड़ा कारण बनता है।

कुछ ऐसे भी मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें शिकायत दर्ज कराने वाली पुलिस ही गवाही से मुकर गई। पुलिस अधिकारी कोर्ट में नहीं टिकने वाले ऐसे मामलों की समीक्षा भी करते हैं, लेकिन उसका फलाफल सामने नहीं आता। यहां तक कि पुलिस उक्त केस में दोबारा कोई कोशिश नहीं कर पाती है।
कुछ प्रमुख मामले, जिसमें पुलिस नहीं जुटा पाई साक्ष्य
महिला टीचर की हत्या का मामला

रांची के चुटिया थाना क्षेत्र के एक प्रसिद्ध स्कूल की महिला टीचर की धुर्वा थाना क्षेत्र में हत्या हुई थी। पुलिस ने फोरेंसिक व तकनीकी साक्ष्य के आधार पर आरोपित को गिरफ्तार किया और जेल भी भेजा। मामला संवेदनशील था। पुलिस ने जिन दलीलों के साथ आरोपित को गिरफ्तार कर भेजा था, वे दलील कोर्ट में नहीं टिक पाए। नतीजा यह हुआ कि आरोपित बाइज्जत बरी हो गया।
धनबाद में डिप्टी मेयर हत्याकांड

धनबाद में डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड में वहां की पुलिस ने उनके चचेरे भाई पूर्व विधायक संजीव कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। संजीव कुमार लंबे समय तक जेल में रहे। जेल में रहने के बाद उनकी मानसिक स्थिति खराब हो गई। इसके बाद संजीव कुमार को मानसिक आरोग्यशाला में भी भर्ती कराया गया था। न्यायालय में ट्रायल चला और साक्ष्य के अभाव में संजीव कुमार बाइज्जत बरी हो गए।
छात्र विनय महतो हत्याकांड अब भी अनसुलझा

सफायर इंटरनेशनल स्कूल में छात्र विनय महतो की हत्या मामले में रांची पुलिस ने स्कूल की शिक्षिका, शिक्षिका के पति व बेटे को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उनके विरुद्ध साक्ष्य होने का दावा किया गया था। ट्रायल के दौरान पुलिस के साक्ष्य आरोपितों को दोषी नहीं ठहरा सके। इसका नतीजा यह हुआ कि सभी आरोपित बाइज्जत बरी हो गए। अब यह सवाल सामने है कि छात्र विनय महतो की हत्या किसने की थी।
माओवादी कुंदन पाहन, गैंगस्टर अखिलेश सिंह भी दर्जनभर से अधिक कांडों में हो चुके हैं बरी

कुख्यात माओवादी कुंदन पाहन, अपराधी अखिलेश सिंह भी साक्ष्य के अभाव में दर्जनभर से अधिक कांडों में बरी हो चुके हैं। हालांकि, दोनों अभी जेल में ही हैं, लेकिन दूसरे केस में। जिस तरह से उनके विरुद्ध दर्ज कांडों में गवाह व साक्ष्य नहीं मिल रहे हैं, उससे यह पता चलता है कि बहुत जल्द सभी जेल से बाहर हो जाएंगे।
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