इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।
जागरण संवाददाता, खटीमा । सिर्फ सीसी कैमरों का ही सहारा है। अगर इन कैमरों ने साथ दिया तो हो सकता है कि पुलिस के हाथ एक-दो दिन में हत्यारों के गिरेबां तक पहुंच जाए, वरना देवभूमि धर्मशाला कालोनी में दूसरी मंजिल पर अकेली रह रहीं 65 वर्षीय जानकी चंद की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत मामले की गुत्थी सुलझाने में वक्त लग सकता है।
सबसे बड़ा सवाल है कि यह हत्या है या कोई हादसा? यदि हादसा है तो मकान का मुख्य दरवाजा और चैनल बाहर से बंद कैसे मिले? और यदि हत्या है तो वारदात को अंजाम किसने दिया?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल मकान के बंद होने की स्थिति को लेकर है। मुख्य दरवाजे पर बाहर से कुंडा लगा था और चैनल गेट पर भी बाहर से ताला जड़ा मिला। यदि जानकी चंद घर में अकेली थीं और अंदर उसकी लाश पड़ी थी तो दरवाजे और चैनल को बाहर से किसने बंद किया? क्या कोई ऐसा था, जिसने आराम से जानकी चंद का कत्ल किया और फिर आराम से वारदात के बाद बाहर से ताला लगाकर वहां से खिसक लिया।
इससे भी बड़ा सवाल यह है कि अगर वृद्धा की हत्या की गई है तो हत्या के पीछे मकसद क्या था। इतनी वृद्ध महिला का किसी से कोई रंजिश होने का कोई कारण नजर नहीं आता और घटनास्थल पर प्रारंभिक जांच में ऐसा कुछ सामने नहीं आया है कि घर में कोई लूटपाट की गई हो या फिर कोई लूट की नीयत रही हो।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी बढ़ाई उलझन
शव का पोस्टमार्टम डा.वीपी सिंह और डा. सिमरनजीत सिंह के पैनल द्वारा किया गया, जिसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। डा.वीपी सिंह के अनुसार वृद्धा के सिर पर चोट का निशान था, हालांकि हड्डी में फ्रैक्चर नहीं पाया गया। गले पर हल्का निशान भी मिला है। चिकित्सकों ने बताया कि चोट 48 घंटे के भीतर लगी थी। हृदय का आकार सामान्य से बड़ा पाया गया है।
मृत्यु का कारण स्पष्ट न होने पर बिसरा जांच के लिए सुरक्षित कर भेजा जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है क्या मौत चोट के कारण हुई या किसी अन्य वजह से? क्या यह चोट गिरने से लगी या किसी हमले का परिणाम थी? शांत मानी जाने वाली कालोनी में हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों को स्तब्ध कर दिया है। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हैं कि आखिर जानकी चंद की मौत के पीछे सच क्या है?
सत्संग में जाने की थी तैयारी, उससे पहले हो गई अनहोनी
जानकी चंद पिछले आठ-दस वर्षों से कबीरपंथी संत रामपाल महाराज की अनुयायी थीं और नियमित रूप से सत्संग में जाती थीं। उन्हें दिल्ली स्थित सतलोक आश्रम, मुंडका में 26 फरवरी से आयोजित तीन दिवसीय समागम में शामिल होना था। वह 20 फरवरी को दिल्ली रवाना होने की तैयारी में थीं, जहां अपनी बेटियों के पास ठहरकर समागम में भाग लेने वाली थीं। लेकिन उससे पहले ही यह घटना घट गई।
बेटा पंजाब में और बेटियां दिल्ली में, अकेले ही रहती थी मृतका
जानकी चंद के पति हरीश चंद बंगाल इंजीनियर्स से सेवानिवृत्त थे और वर्ष 2015 में उनका निधन हो चुका था। उनके एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। बेटा सूरज चंद गोरखा रेजीमेंट में तैनात है और पंजाब में कहीं तैनात है, जबकि दोनों बेटियां विवाह के बाद दिल्ली में रहती हैं। घटना की सूचना मिलते ही बेटा और बेटियां खटीमा पहुंच गए।
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