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कैमूर के थानों में जब्त वाहन बने कबाड़, नीलामी के इंतजार में जंग खा रहे करोड़ों के संसाधन

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कैमूर के थानों में जब्त वाहन बने कबाड़



संवाद सूत्र, रामपुर। स्थानीय प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न थानों में जब्त किए गए वाहन वर्षों से खुले आसमान के नीचे खड़े-खड़े जंग खा रहे हैं। रखरखाव और समय पर नीलामी की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण ये वाहन अब कबाड़ में तब्दील होते जा रहे हैं।

स्थिति यह है कि थाना परिसर में जगह की भारी कमी हो गई है और नए जब्त वाहनों को रखने में भी परेशानी हो रही है। बेलांव थाना परिसर का दृश्य इस समस्या का उदाहरण है।  

यहां अलग-अलग मामलों में जब्त की गई दर्जनों बाइकें और अन्य छोटे-बड़े वाहन अव्यवस्थित ढंग से खड़े हैं। कई वाहनों के टायर पंक्चर हो चुके हैं, सीटें फट गई हैं और बाडी पर जंग की मोटी परत चढ़ चुकी है।  
सात से आठ वर्षों से थाना परिसर में पड़े वाहन

कुछ वाहन तो ऐसे हैं जो पिछले सात से आठ वर्षों से थाना परिसर में ही पड़े हुए हैं। लगातार धूप, वर्षा और धूल-मिट्टी के कारण इनकी स्थिति और खराब होती जा रही है। जानकारी के अनुसार, दुर्घटना, शराब तस्करी, मारपीट, चोरी समेत विभिन्न आपराधिक मामलों में वाहनों को जब्त किया जाता है।  

जब्त वाहनों को सामान्यतः सीजर सूची बनाकर मालखाना में दर्ज किया जाता है। इसके बाद न्यायालय के निर्देश पर ही उन्हें छोड़ा या नीलाम किया जा सकता है। लेकिन कई मामलों में केस लंबित रहने या कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण वाहन वर्षों तक थाने में ही खड़े रह जाते हैं।  
वाहन धीरे-धीरे बेकार होते जा रहे

थाना परिसर में खड़े लावारिस और बेनामी वाहनों की संख्या भी कम नहीं है। नियमानुसार एक निश्चित समय सीमा के बाद ऐसे वाहनों की नीलामी की जा सकती है, लेकिन प्रक्रिया जटिल होने और समय पर पहल नहीं होने से नीलामी नहीं हो पाती।  

परिणामस्वरूप ये वाहन धीरे-धीरे बेकार होते जा रहे हैं और थाना परिसर की सुंदरता व व्यवस्था पर भी असर डाल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब्त वाहनों की नियमित समीक्षा कर शीघ्र नीलामी की जानी चाहिए। इससे एक ओर जहां थाना परिसर में जगह खाली होगी, वहीं सरकार को राजस्व की प्राप्ति भी हो सकती है।  
मामला लंबित रहने तक वाहन को हटाया नहीं जा सकता

इस संबंध में प्रभारी थानाध्यक्ष परमहंस कुमार ने कहा कि जब्त वाहनों की नीलामी एक विधिक प्रक्रिया के तहत की जाती है। न्यायालय में मामला लंबित रहने तक वाहन को हटाया नहीं जा सकता।  

केस के अंतिम निर्णय या न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद ही नीलामी या वाहन रिलीज की कार्रवाई संभव होती है। विभागीय स्तर पर समय-समय पर सूची तैयार कर आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा जाता है।
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