भागलपुर हवाई अड्डा विस्तार योजना में तेजी, साइट विजिट से पहले रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर हवाई अड्डे के विकास को लेकर प्रक्रिया में तेजी आ गई है। बिहार सरकार के सिविल विमानन विभाग ने भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा प्रस्तावित साइट विजिट और पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन से पहले विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करने का निर्देश दिया है। इसके लिए विभाग ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर आवश्यक जानकारी शीघ्र उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव डा. निलेश रामचंद देवरे द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि भागलपुर हवाई अड्डा के विकास के लिए तकनीकी अध्ययन से पहले कई अहम बिंदुओं पर प्रतिवेदन तैयार करना अनिवार्य है। इसमें प्रस्तावित स्थल के निर्देशांक डब्ल्यूजीएस-84 प्रणाली के तहत उपलब्ध कराने, स्थल का राजस्व मानचित्र जिसमें खेसरा संख्या स्पष्ट रूप से अंकित हो, और स्थल का समग्र ज्यामितीय आकार व आयाम दिखाने वाले विस्तृत रेखाचित्र शामिल हैं।
पत्र में यह भी कहा गया है कि प्रतिवेदन में 1:50,000 के पैमाने पर भारतीय सर्वेक्षण विभाग का मानचित्र, पिछले दस वर्षों का मौसम संबंधी डेटा जो भारतीय मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त हो, विंड रोज आरेख और भूमि की सीमा दर्शाने वाला समोच्च मानचित्र भी शामिल होना चाहिए। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इससे पहले 23 दिसंबर 2025 को भी प्रतिवेदन मांगा जा चुका है, लेकिन अब AAI की साइट विजिट को देखते हुए रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध कराना जरूरी हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिवेदन मिलने के बाद भागलपुर हवाई अड्डे के विस्तार और विकास की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हवाई अड्डे के विकास से न केवल भागलपुर शहर बल्कि आसपास के जिलों को भी हवाई संपर्क का लाभ मिलेगा। इससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा मिलेगी और पर्यटन, व्यापार तथा निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
विकास की प्रक्रिया में तकनीकी अध्ययन और साइट विजिट के अलावा स्थानीय प्रशासन और विभागीय अधिकारियों का समन्वय भी अहम माना जा रहा है। प्रतिवेदन तैयार होने के बाद भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण विस्तार योजनाओं, रनवे और हवाई सुविधाओं के डिजाइन और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे का मूल्यांकन करेगा। इससे हवाई अड्डा आधुनिक मानकों के अनुरूप विकसित होगा और क्षेत्र के लिए लंबे समय तक लाभकारी साबित होगा।
भागलपुर हवाई अड्डा विकसित होने पर न केवल उड़ान सेवाओं में सुधार होगा, बल्कि क्षेत्र में रोजगार सृजन और व्यापारिक अवसर भी बढ़ेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि इस परियोजना से पूर्वी बिहार का हवाई नेटवर्क मजबूत होगा और पूरे क्षेत्र का आर्थिक एवं सामाजिक विकास प्रभावित होगा। |