ढाका। Tariq Rahman Government: बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के महज तीन दिन बाद ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। प्रधानमंत्री के रूप में तारिक़ रहमान के शपथ लेने के बाद जहां नई सरकार अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी है, वहीं अवामी लीग के विभिन्न जिलों में पार्टी दफ्तरों के फिर से खुलने की खबरों ने विवाद खड़ा कर दिया है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में सलाहकार रहे और अब नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के संयोजक नाहिद इस्लाम ने इस घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर राजनीतिक संकेत बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई नहीं की तो राजनीतिक प्रतिरोध किया जाएगा।
बिना सरकार की सहमति संभव नहीं
गुरुवार दोपहर ढाका के एनसीपी के अस्थायी केंद्रीय कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाहिद इस्लाम ने कहा कि अवामी लीग के दफ्तरों का खुलना साधारण घटना नहीं है। उन्होंने कहा, “बिना सरकार की हरी झंडी के इस तरह कई जिलों में पार्टी कार्यालय नहीं खुल सकते। प्रशासन को जवाब देना होगा कि यह कैसे हुआ।” नाहिद इस्लाम, जो संसद में विपक्ष के मुख्य सचेतक भी हैं, ने आरोप लगाया कि हालिया चुनाव में भारत, अवामी लीग और बीएनपी के बीच किसी प्रकार की समझदारी या मिलीभगत हो सकती है। हालांकि उन्होंने इस आरोप के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए, लेकिन यह बयान राजनीतिक माहौल को और गरमा गया है।
‘फासीवाद’ की वापसी का आरोप
एनसीपी का गठन उन्हीं छात्र नेताओं ने किया था जिन्होंने जुलाई 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाया था और मोहम्मद यूनुस को नेतृत्व के रूप में आगे बढ़ाया था। नाहिद इस्लाम ने कहा कि अवामी लीग की राजनीति को फिर से स्थापित करने की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा, अगर प्रशासन तुरंत इन कार्यालयों को बंद करने में नाकाम रहता है, तो हम राजनीतिक प्रतिरोध का आह्वान करेंगे। हम सरकार को भी जवाबदेह ठहराएंगे यदि फासीवादी ताकतों को फिर से पैर जमाने दिया गया।
खुले अवामी लीग के दफ्तर
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अवामी लीग के कार्यालय कम से कम 10 जिलों में 12 स्थानों पर फिर से सक्रिय हुए हैं। एक अंग्रेजी समाचार वेबसाइट की 19 फरवरी की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरिम सरकार के दौरान अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक थी। लेकिन बीएनपी सरकार के सत्ता में आने के बाद कई स्थानों पर पार्टी के बैनर लगाए गए और दफ्तरों में गतिविधियां शुरू हुईं।
खुलना में क्या हुआ?
प्रथम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, खुलना शहर में पार्टी कार्यकर्ताओं का एक समूह लोअर जेसोर रोड स्थित कार्यालय में पहुंचा। कार्यालय बंद था, ताला तोड़ा गया और अंदर प्रवेश कर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यकर्ताओं ने बंगबंधु शेख मुजीब-उर रहमान और अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की तस्वीरों पर पुष्पांजलि अर्पित की और “जय बांग्ला” के नारे लगाए। एक पूर्व छात्र लीग नेता ने कहा, “हम किसी संगठित कार्यक्रम के तहत नहीं गए थे। हमने देखा कि केंद्रीय कार्यालय में ऐसा हुआ था, इसलिए हम भी पहुंचे। हमने ताला तोड़ा, ध्वज फहराया और बाद में नया ताला लगा दिया। किसी ने हमें नहीं रोका।”
अन्य जिलों की स्थिति
रिपोर्टों के अनुसार, नोआखाली और बर्गुना जैसे जिलों में भी अवामी लीग कार्यकर्ताओं ने जिला कार्यालयों में प्रवेश कर बैनर लगाए और संक्षिप्त कार्यक्रम आयोजित किए। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं।
सरकार की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं
तारिक़ रहमान सरकार की ओर से इस मुद्दे पर औपचारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। प्रशासनिक स्तर पर क्या कार्रवाई की गई है, इस पर भी स्पष्टता का अभाव है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार के सामने यह पहला बड़ा परीक्षण है- क्या वह विपक्ष की चिंताओं को गंभीरता से लेती है या इसे सामान्य राजनीतिक गतिविधि मानती है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में नरमी के संकेत
इसी बीच बांग्लादेश के नए खेल मंत्री अमीनुल हक़ ने भारत के साथ संबंध सुधारने के संकेत दिए हैं। मंगलवार को शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने संसद भवन में भारत के उप उच्चायुक्त से मुलाकात की। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “हम इस मुद्दे को बातचीत के जरिए जल्द सुलझाना चाहते हैं। हम अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहते हैं।”
टी-20 विश्व कप विवाद
मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश ने क्रिकेटर मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल से बाहर किए जाने के विरोध में भारत में आयोजित टी-20 विश्व कप में भाग न लेने का फैसला किया था। अमीनुल हक़ ने संकेत दिया कि यदि कूटनीतिक स्तर पर पहले चर्चा होती, तो संभवतः बांग्लादेश की टीम विश्व कप में हिस्सा ले सकती थी। उन्होंने कहा, “खेल से लेकर अन्य सभी क्षेत्रों तक, हम भारत के साथ ईमानदार और सौहार्दपूर्ण संबंध चाहते हैं।”
सियासी समीकरणों पर असर?
अवामी लीग के दफ्तरों का फिर से खुलना और भारत के साथ संबंध सुधारने की पहल इन दोनों घटनाओं ने बांग्लादेश की राजनीति में नए समीकरणों की अटकलें तेज कर दी हैं। एनसीपी जैसे दल इसे सत्ता और पुरानी राजनीतिक शक्तियों के बीच संभावित समझौते के रूप में देख रहे हैं, जबकि सरकार समर्थक हलकों का तर्क है कि लोकतांत्रिक ढांचे में राजनीतिक दलों की गतिविधियों पर स्थायी प्रतिबंध संभव नहीं है। विश्लेषकों का कहना है कि नई सरकार को संतुलन बनाना होगा- एक ओर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कायम रखना, दूसरी ओर विपक्ष की आशंकाओं को दूर करना।
राष्ट्रीय बहस का विषय
नाहिद इस्लाम ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि प्रशासन ने अवामी लीग के कार्यालयों को बंद नहीं किया, तो एनसीपी राजनीतिक आंदोलन शुरू कर सकती है। इस बीच, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और मीडिया रिपोर्टों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। तारिक रहमान सरकार के लिए यह शुरुआती चुनौती है, जो यह तय करेगी कि देश में राजनीतिक स्थिरता किस दिशा में जाएगी। क्या यह लोकतांत्रिक बहुलवाद की ओर कदम होगा या फिर टकराव की नई शुरुआत इसका जवाब आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

Editorial Team
Political turmoil in BangladeshBangladesh PoliticsIndia Bangladesh relationsNahid IslamAwami LeagueSheikh Hasinaअवामी लीग
Next Story |