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यूपी में फिंगर से ही नहीं अब रेटीना से होगा रजिस्ट्री का प्रमाणीकरण, निबंधन विभाग ने की ये व्यवस्था

cy520520 3 hour(s) ago views 1016
  



जागरण संवाददाता, पीलीभीत। संपत्ति के पंजीकरण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए निबंधन विभाग और एक कदम उठाने जा रहा है। रजिस्ट्री कार्यालयों में क्रेता-विक्रेता और गवाहों के प्रमाणीकरण के लिए केवल फिंगरप्रिंट उंगलियों के निशान पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि अब रेटीना स्कैन के माध्यम से भी सत्यापन किया जा सकेगा।

दरअसल, अब तक की व्यवस्था में सबसे बड़ी बाधा उन बुजुर्गों और शारीरिक श्रम करने वाले लोगों के साथ आती थी, इनकी उम्र के साथ या अत्यधिक मेहनत के कारण उंगलियों की रेखाएं घिस जाती थीं।

ऐसे मामलों में बायोमीट्रिक मशीन फिंगरप्रिंट स्वीकार नहीं करती थी, जिससे रजिस्ट्री की प्रक्रिया बीच में ही लटक जाती थी और पक्षकारों को कई दिनों तक कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते थे।

आईजी स्टांप सतीश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि रजिस्ट्री कार्यालयों सदर, पूरनपुर और बीसलपुर में अभी फिंगर प्रिंट के माध्यम से रजिस्ट्री हो रही है।

कभी-कभी बुजुर्गों की उंगलियों की रेखा मिटने के कारण परेशानी हो रही थी, लेकिन अब उनके लिए रेटीना स्कैनर मशीनों का उपयोग शुरू किया जाएगा। इसमें आधार प्रमाणीकरण की तर्ज पर काम करेगी, इससे धोखाधड़ी और गलत पहचान की गुंजाइश भी शून्य हो जाएगी।

बुजुर्गों और श्रमिकों को मिलेगी बड़ी राहत

अक्सर देखा गया है कि 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और खेतों या कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के फिंगरप्रिंट मैच न होने के कारण साफ्टवेयर उन्हें रिजेक्ट कर देता था। ऐसे में तहसील स्तर पर कई बार मैन्युअल वेरिफिकेशन में लंबा समय लगता था। अब रेटीना स्कैनिंग की सुविधा शुरू होने से बिना किसी परेशानी के आंखों के स्कैन से पहचान सुनिश्चित हो जाएगी।

तीनों तहसीलों में होगी व्यवस्था

सदर तहसील सहित पूरनपुर और बीसलपुर के निबंधन कार्यालयों को नए साफ्टवेयर और उपकरणों से लैस किया जा रहा है। उप-निबंधकों को निर्देशित किया गया है कि यदि किसी भी पक्षकार के फिंगरप्रिंट आने में समस्या हो, तो तत्काल रेटीना स्कैनर का उपयोग किया जाएगा।


फिंगरप्रिंट न आने की शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए रेटीना स्कैनिंग का विकल्प अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया गया है। सभी जिला निबंधकों को आदेश जारी किए जा रहे है। वे बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में किसी भी पक्षकार को परेशान न होने दें और तकनीकी सुविधाओं को पहुंचाना सुनिश्चित करें।

-सतीश कुमार त्रिपाठी, आईजी स्टांप, पीलीभीत
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