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विष्णुपद गलियारे पर मुहर की तैयारी; पिंडदानियों की सुविधा होगी प्राथमिकता, प्रवेश-निकास और बाजार पर फोकस

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गया स्‍थ‍ित व‍िश्‍वप्रसि‍द्ध व‍िष्‍णुपद मंदिर। फाइल  



जागरण संवाददाता, गयाजी। विश्वप्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर के समग्र विकास के लिए प्रस्तावित विष्णुपद गलियारा परियोजना को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है।

इस दिशा में रविवार को गयाजी जिला अतिथि गृह में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने की।

बैठक के दौरान कार्यदायी एजेंसी ने विष्णुपद गलियारे का प्रारूप पीपीटी (PowerPoint Presentation) के माध्यम से प्रस्तुत किया।

प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि इस परियोजना के तहत मंदिर परिसर के बाहरी परिदृश्य को सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए अधिक सुगम बनाया जाएगा।

मंदिर में प्रवेश और निकास के लिए वृहद द्वार, बेहतर मार्ग व्यवस्था और सुविधाओं के विस्तार का प्रस्ताव रखा गया है।
पिंडदानियों की सुविधा पर विशेष फोकस

एजेंसी की ओर से बताया गया कि मंदिर के भीतर ऐसे कई स्थल हैं, जहां पिंडदानियों और श्रद्धालुओं को असुविधा होती है।

उन्हें सुगम बनाने की योजना है, ताकि श्रद्धालु बिना किसी कठिनाई के धार्मिक कर्मकांड संपन्न कर सकें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि श्रद्धालुओं की आस्था को किसी प्रकार की ठेस नहीं पहुंचेगी।

प्रस्ताव के अनुसार मंदिर के फल्गु नदी तट तथा पश्चिमी भाग में भी व्यापक विकास की संभावना है। पिंडदानियों के मंदिर तक पहुंचने वाले मार्ग को अत्यंत सुविधाजनक बनाया जाएगा तथा यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने और विश्राम की सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
बाजार, लॉकर और धार्मिक जानकारी केंद्र की योजना

बैठक में बताया गया कि विष्णुपद मंदिर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से के साथ-साथ विष्णु मार्ग को आकर्षक रूप दिया जाएगा।

श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद व पूजन सामग्री के स्टॉल, मोबाइल रखने के लिए लॉकर, गयाजी धाम से जुड़े संदेश और धार्मिक वस्तुओं की बिक्री हेतु मंदिर से कुछ दूरी पर नए बाजार क्षेत्र के विकास की भी योजना है।

इसके साथ ही विष्णुपद से जुड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक जानकारी देने के लिए विशेष सूचना केंद्र भी प्रस्तावित है।
गयापाल पुरोहितों की चिंता, आस्था से समझौता नहीं

बैठक में शामिल गयापाल पुरोहितों ने विष्णुपद मंदिर के भीतरी भाग में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मंदिर का आंतरिक भाग सनातन आस्था का केंद्र है और इसमें किसी भी बदलाव से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो सकती हैं।  

पुरोहितों ने यह भी स्पष्ट किया कि पितृपक्ष मेला के दौरान चार दिनों तक देवपरिधि में होने वाला पिंडदान किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होना चाहिए।
विधानसभा अध्यक्ष का स्पष्ट निर्देश

इस पर हस्तक्षेप करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कार्य एजेंसी को सख्त निर्देश दिया कि विकास कार्यों में आस्था सर्वोपरि रहे।

उन्होंने कहा कि पहले मंदिर के बाहरी परिदृश्य के विकास की कार्ययोजना तैयार की जाए और आंतरिक संरचना से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न की जाए।

उन्होंने विष्णुपद मंदिर क्षेत्र में सरकारी और निजी जमीन को चिह्नित करने का निर्देश देते हुए जिलाधिकारी से कहा कि आपसी सहमति के आधार पर भूमि की मापी कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जमीन अधिग्रहण, मापी और अन्य प्रक्रियाओं को लेकर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया गया।
समन्वय से आगे बढ़ेगा कार्य

अध्यक्ष ने संबंधित विभागों, कार्य एजेंसी, विष्णुपद प्रबंधकारिणी, डिजाइनर और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक कर सभी बिंदुओं को स्पष्ट करने के निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी शशांक शुभंकर, एडीएम (राजस्व) परितोष कुमार, संवास सदन समिति के सचिव धनराज कुमार तथा गयापाल पुरोहितों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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