मौसम में आए बदलाव से साफ हुई राजधानी की हवा, कर्तव्यपथ के आसपास का नजारा। (फाइल फोटो)
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली और एनसीआर समेत देशभर में सांस लेने वाली हवा कितनी शुद्ध है, इसे मापने वाले पैमानों (राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक) में 17 साल बाद एक बड़ा बदलाव होने की उम्मीद जगी है।
वजह, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर ने संशोधित मानकों पर अपनी अंतिम तकनीकी रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को सौंप दी है। इस आशय की पुष्टि स्वयं सीपीसीबी सामाजिक कार्यकर्ता अमित गुप्ता की एक आरटीआइ के जवाब में की है।
2009 के बाद पहली बार संशोधन
दकश में वायु गुणवत्ता के मौजूदा मानक आखिरी बार साल 2009 में तय किए गए थे। लंबे समय से विशेषज्ञ इन मानकों को पुराना और स्वास्थ्य के लिए अपर्याप्त बता रहे थे। 19 दिसंबर 2025 के अंक में \“\“16 साल पुराने वायु गुणवत्ता मानकों के जरिये लड़ी जा रही आज के प्रदूषण से जंग\“\“ शीर्षक से प्रकाशित खबर में जागरण में भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
आरटीआई के जवाब में मिली जानकारी के अनुसार, आईआईटी कानपुर को दिसंबर 2021 में इन मानकों की समीक्षा का काम सौंपा गया था। तीन साल में उसे समीक्षा रिपोर्ट दे देनी थी। लेकिन रिपोर्ट सौंपने में लगभग एक साल की देरी हुई और अब आखिरकार सीपीसीबी को यह अंतिम रिपोर्ट मिल गई है।
डब्ल्यूएचओ के मानकों से अब भी बहुत पीछे है भारत
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में वर्तमान में पीएम 2.5 (हवा में मौजूद सूक्ष्म कण) का 24 घंटे का औसत मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार यह केवल 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होना चाहिए। इसी तरह वार्षिक मानक में भी भारी अंतर है। नए संशोधनों से उम्मीद है कि भारत अपने मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के करीब लाएगा ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य की बेहतर सुरक्षा हो सके।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
सीसीपीबी के पूर्व अपर निदेशक डा एस के त्यागी और सीपीसीबी के सदस्य डा अनिल गुप्ता के अनुसार कम प्रदूषण स्तर पर भी स्वास्थ्य जोखिम बने रहते हैं। \“\“सेंटर फार रिसर्च आन एनर्जी एंड क्लीन एयर\“\“ के मनोज कुमार ने बताया कि वायु गुणवत्ता के मानकों को सख्त करना \“\“राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम\“\“ (एनसीएपी) का प्रमुख हिस्सा था, जो काफी समय से लंबित था।
मुख्य बिंदु:-
- देरी का कारण : प्रोजेक्ट की अवधि नवंबर 2024 तक थी, लेकिन अंतिम रिपोर्ट दिसंबर 2025 के अंत में सौंपी गई।
- बजट : इस अध्ययन के लिए सीपीसीबी ने 19.5 लाख रुपये का फंड आवंटित किया था।
- अगला कदम : सीपीसीबी अब इस रिपोर्ट का अध्ययन करेगा और जल्द ही नए राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों की घोषणा कर सकता है।
यह भी पढ़ें- दिल्ली में फरवरी में भी प्रदूषण ने नहीं छोड़ा पीछा, AQI 229 और तापमान 30 डिग्री के करीब दर्ज
यह भी पढ़ें- दिल्ली में गुजरती फरवरी के साथ सर्दी की विदाई तय, बढ़ते तापमान से बदला मौसम का मिजाज; आज छाए रहेंगे बादल |