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अंगूठे ने दिया दगा, नहीं हो सकी 3.74 करोड़ के मकान की लिखापढ़ी, बायोमेट्रिक नहीं होने से रुक गई रजिस्ट्री

deltin33 1 hour(s) ago views 370
  



जागरण संवाददाता, कानपुर। अंगूठे के दगा देने से सोमवार को 3.74 करोड़ के मकान की लिखापढ़ी नहीं हो सकी। मकान के छह मालिकों में एक के अंगूठे की छाप न होने से आधार से डाटा लिंक नहीं हो सका। इस पर सब रजिस्ट्रार ने मकान की रजिस्ट्री करने से इनकार कर दिया। इसका अन्य कोई विकल्प भी नहीं है।

बताया गया कि कुछ ही दिनों में आंखों के रेटिना से बायोमेट्रिक की सुविधा शुरू होने वाली है, तब रजिस्ट्री करा ली जाए। यह भी कहा कि अन्य विकल्प के बारे में मुख्यालय से बात की जाएगी। अगर ऐसा हुआ तो सूचना देकर रजिस्ट्री के लिए बुला लिया जाएगा। इस पर अन्य राज्यों से आए मकान मालिक मायूस हो गए।  

दरअसल, मकान, दुकान, फ्लैट, जमीन की खरीद और बिक्री पर बायोमेट्रिक होता है। इसके तहत अंगूठे की छाप मशीन पर लगानी होती है। अंगूठे की छाप से संबंधित व्यक्ति का आधार लिंक हो जाता है और यह तय हो जाता है कि रजिस्ट्री कराने वाला व्यक्ति ही संपत्ति का मालिक है।

मेस्टन रोड स्थित एक मकान के मालिक मयूर विहार दिल्ली निवासी प्रेम प्रकाश, वसुंधरा गाजियाबाद निवासी पूनम बाजपेई, पुणे महाराष्ट्र निवासी ज्योति समीर बाफाना, सोनीपत हरियाणा निवासी दीप्ती तिवारी और वसुंधरा गाजियाबाद निवासी आशुतोष प्रकाश बाजपेई ने नया चौक परेड निवासी जिलानी बाबू को मकान तीन करोड़ 74 लाख 20 हजार रुपये में बेचा है।

सोमवार को इसकी रजिस्ट्री के लिए सभी लोग शहर आए थे। अधिवक्ता नदीमुद्दीन ने बताया कि 88 वर्षीय प्रेम प्रकाश का अंगूठा छाप मशीन से नहीं हो सका। इस पर रजिस्ट्रार ने रजिस्ट्री से इनकार कर दिया। रजिस्ट्री के लिए 24.35 लाख का स्टांप और 3.74 लाख रजिस्ट्रेशन फीस लगी है।  

सब रजिस्ट्रार शिवांक श्रीवास्तव ने बताया कि बिना बायोमेट्रिक के रजिस्ट्री नहीं हो सकती है। बायोमेट्रिक से ही आधार से डाटा मैच होने पर रजिस्ट्री कराने वाले की पहचान होती है।   
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