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हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने एक शिक्षक को जबरन रिटायर कर दिया। प्रतीकात्मक फोटो
राज्य ब्यूरो, शिमला। भ्रष्टाचार के आरोप में संलिप्त शिक्षक पर शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने उसे जबरन सेवानिवृत्त कर दिया है। निदेशक स्कूल शिक्षा विभाग आशीष कोहली की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। जिला सिरमौर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नागेटा में कार्यरत गणित प्रवक्ता हरदीश कुमार के विरुद्ध यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
हरदीश कुमार पर वर्ष 2021 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, तरुवाला में आईसीटी लैब प्रभारी के पद पर कार्यरत थे। इस दौरान उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।
फोन पर मांगी थी रिश्वत
जून 2021 में उन्होंने कथित रूप से एक सामग्री आपूर्तिकर्ता से टेलीफोन पर रिश्वत की मांग की थी, जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गई थी। मामला सामने आने के बाद 23 जुलाई 2021 को पुलिस थाना नाहन में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत एफआइआर दर्ज की गई थी। इसके बाद 16 अक्टूबर 2021 को केंद्रीय सिविल सेवा नियम, 1965 के नियम 14 के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई।
जांच के बाद मांगा स्पष्टीकरण
जांच अधिकारी द्वारा विस्तृत जांच के बाद 2 सितंबर 2024 को प्रस्तुत रिपोर्ट में आरोपों को साक्ष्यों, परिस्थितियों और संबंधित अधिकारी की स्वीकारोक्ति के आधार पर सिद्ध पाया गया। जांच रिपोर्ट पर अपना पक्ष रखने का अवसर दिए जाने के बावजूद उनका उत्तर संतोषजनक नहीं पाया गया।
शिक्षक से नैतिक भ्रष्टाचार स्वीकार्य नहीं
विभाग ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षक समाज में उच्च नैतिक जिम्मेदारी निभाते हैं और उनसे ईमानदारी एवं आचरण की सर्वोच्च अपेक्षा की जाती है। छात्र हितों से जुड़े मामलों में नैतिक भ्रष्टाचार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। अपराध की गंभीरता और जन विश्वास के उल्लंघन को देखते हुए हरदीश कुमार को सरकारी सेवा में बने रहने के अयोग्य मानते हुए उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति की सजा दी है।
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