केंद्रीय गृह मंत्री का स्वागत करते उद्योग मंत्री डा. दिलीप जायसवाल व मौजूद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व अन्य।
जागरण संवाददाता, किशनगंज। पड़ोसी देशों नेपाल और बांग्लादेश के लगातार बदलते हालात और भारत के साथ संबंधों में आ रहे उतार-चढ़ाव के बीच सीमांचल क्षेत्र अब केंद्र सरकार की विशेष निगाह में है। पिछले कुछ वर्षों में नेपाल व बांग्लादेश के रास्ते चीन और पाकिस्तान के इरादों को लगातार सतर्कता से देखा जा रहा है। केंद्र सरकार ने यह तय कर लिया है कि घुसपैठ, अवैध गतिविधियों और भारत में आतंकियों की सहज प्रवेश की संभावना पर कड़ा नियंत्रण रखा जाएगा। साथ ही, युद्ध जैसी आपात परिस्थितियों में भी सीमांचल को सामरिक दृष्टि से मजबूत केंद्र बनाने की तैयारी तेज कर दी गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बुधवार से शुरू हुआ तीन दिवसीय सीमांचल प्रवास इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उनका दौरा इस क्षेत्र में केंद्र सरकार की सुरक्षा, निगरानी और विकास योजनाओं को जमीन पर लागू करने का महत्वपूर्ण कदम है। किशनगंज से शुरू हुए उनके दौरे में पहले दिन किशनगंज समाहरणालय में दो सत्रों में बैठक आयोजित की गई। इसमें बिहार के गृह मंत्री, पुलिस महानिदेशक, प्रमंडलीय आयुक्त, आइजी, सभी जिलों के डीएम और एसपी शामिल हुए। इसके अलावा एसएसबी और बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।
लैंड पोर्ट से जुड़ी रणनीति और विकास योजना
बैठक में लैंड पोर्ट को लेकर चर्चा हुई, लेकिन सीमांचल क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक महत्व मुख्य फोकस रहा। नेपाल और बांग्लादेश से जुड़े सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति, सुरक्षा के लिहाज से उनकी संभावनाएं और आवश्यकताएं विस्तार से उठाई गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में इस इलाके की तस्वीर बदल रही है। थल और वायु स्तर पर सामरिक समृद्धि को लगातार नए आयाम मिल रहे हैं। इस दौरे का उद्देश्य सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास को भी जोड़कर योजना को मजबूत बनाना है।
गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक में यह स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसके तहत सभी एजेंसियों को आपसी तालमेल के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने सीमांचल क्षेत्र में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत चल रही योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। इस योजना के तहत सीमावर्ती गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि गांवों से पलायन रोकने के साथ-साथ सुरक्षा मजबूत हो।
घुसपैठ और डेमोग्राफी परिवर्तन पर सख्त नजर
बैठक में घुसपैठ और सीमांचल में बदलती जनसंख्या पर भी गंभीर चर्चा हुई। 2011 की जनगणना के बाद सीमांचल में अल्पसंख्यकों की बढ़ती आबादी को केंद्र सरकार ने सतर्कता से देखा। इसे बांग्लादेशी घुसपैठ, उच्च जन्म दर और स्थानीय सामाजिक-आर्थिक कारणों से जोड़ा गया है। अमित शाह ने कहा कि इस मामले में सख्त कदम उठाए जाएंगे और घुसपैठियों की पहचान कर उनके प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सीमांचल न केवल बिहार बल्कि पूरे देश की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। नेपाल, बांग्लादेश और चीन द्वारा “चिकन नेक“ और सिलीगुड़ी गलियारा को लेकर जो गतिविधियां होती रही हैं, वह केंद्र सरकार के लिए चिंता का विषय हैं। बैठक में आइबी निदेशक, एडीजी कुंदन कृष्णन, डीजी आईटीबीपी सत्रजीत कपूर, डीजी एसएसबी संजय सिंघल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
वाइब्रेंट विलेज और सामुदायिक विकास
सीमांचल में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत बिहार में कुल 53 गांवों को शामिल किया गया है, जिसमें किशनगंज के 22 गांव शामिल हैं। इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ संपर्क माध्यमों को मजबूत करने पर फोकस किया गया है। इसका उद्देश्य गांवों में पलायन रोकना और स्थानीय आबादी को स्थिर करना है। अमित शाह ने कहा कि यदि लोग इन सीमावर्ती इलाकों में बने रहें, तो अवैध गतिविधियों और अतिक्रमण की संभावनाएं कम होंगी।
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम केवल विकास तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा, पलायन में कमी, स्थानीय संस्कृति का संरक्षण और सुरक्षा बलों के लिए रणनीतिक मदद भी सुनिश्चित की जा रही है। भारत सरकार ने अप्रैल 2025 में इस योजना को मंजूरी दी थी और इसे पूरे देश के 1,954 सीमावर्ती गांवों में लागू किया जा रहा है। इसमें भारत-बांग्लादेश, भारत-नेपाल, भारत-भूटान, भारत-म्यांमार, भारत-पाकिस्तान और अन्य सीमाओं से जुड़े गांव शामिल हैं।
सामरिक सुरक्षा और बहु-स्तरीय निगरानी
बैठक में सीमांचल के लिए बहु-स्तरीय निगरानी और सुरक्षा तंत्र पर भी चर्चा हुई। गृह मंत्री ने कहा कि स्थानीय पुलिस, अर्धसैनिक बल और सेना के बीच बेहतर समन्वय बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि न केवल घुसपैठ रोकने के लिए बल्कि आपात परिस्थितियों में भी क्षेत्र को मजबूत केंद्र बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही, सीमांचल में अवसंरचना विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के माध्यम से स्थानीय आबादी को स्थिर रखना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है।
पड़ोसी देशों को चेतावनी और केंद्र की गंभीरता
अमित शाह के दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि उन्होंने पड़ोसी देशों नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते संभावित खतरों को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि घुसपैठ और अवैध गतिविधियों पर नकेल कसी जाएगी। यदि सीमापार से किसी तरह की चुनौती आई तो केंद्र सरकार का जवाब निर्णायक और सख्त होगा। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि भारत के लिए “चिकन नेक“ और नार्थ ईस्ट का सामरिक महत्व हमेशा प्राथमिकता में रहेगा।
विकास और सुरक्षा का संतुलित दृष्टिकोण
तीन दिवसीय दौरे के दौरान अमित शाह ने यह स्पष्ट किया कि सीमांचल का विकास और सुरक्षा दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। लैंड पोर्ट, वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम, सड़क, बिजली और रोजगार जैसे बुनियादी ढांचे के सुधार से न केवल स्थानीय लोगों की जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि यह क्षेत्र भारत की सामरिक मजबूती में भी योगदान देगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं का कार्यान्वयन पारदर्शी, समयबद्ध और प्रभावी तरीके से किया जाए।
बैठक के बाद अमित शाह ने स्थानीय लोगों से भी मुलाकात की और उनका अभिवादन स्वीकार किया। उन्होंने सीमांचल की समस्याओं को व्यक्तिगत रूप से समझने और समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। अधिकारी और सुरक्षा बल अब इस दिशा में सक्रियता से काम कर रहे हैं, जिससे अगले कुछ महीनों में इस क्षेत्र की सुरक्षा और विकास में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
आगे की राह
गृह मंत्री के दौरे का यह चरण केवल सुरक्षा के नजरिए से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह संकेत भी है कि केंद्र सरकार सीमांचल को रणनीतिक और विकास के दृष्टिकोण से प्राथमिकता दे रही है। आगामी दिनों में सीमांचल के सभी जिलों में सुरक्षा, निगरानी और विकास परियोजनाओं को तेज़ किया जाएगा। अररिया और पूर्णिया में होने वाली बैठकें भी इसी दिशा में निर्णायक साबित होंगी।
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