search

डायबिटीज मरीजों के लिए नई उम्मीद: भारत में ल ...

deltin55 1970-1-1 05:00:00 views 78

नई दिल्ली: भारत में डायबिटीज के मरीजों के लिए एक नई उपचार सुविधा उपलब्ध हो गई है। डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नोर्डिस्क (Novo Nordisk) ने टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित वयस्क मरीजों के लिए सप्ताह में एक बार लगने वाला बेसल इंसुलिन ‘अवीकली’ (Awiqly) लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह दुनिया का पहला ऐसा बेसल इंसुलिन है, जिसे रोजाना के बजाय सप्ताह में केवल एक बार लेना होता है। इस नई थेरेपी से उन मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है जिन्हें अब तक रोज इंसुलिन इंजेक्शन लेना पड़ता था। विशेषज्ञों का मानना है कि कम बार इंजेक्शन लगने से उपचार का पालन करना आसान हो सकता है और मरीजों में इलाज शुरू करने की झिझक भी कम हो सकती है।




365 की जगह केवल 52 इंजेक्शन

नई साप्ताहिक इंसुलिन थेरेपी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि मरीजों को पूरे वर्ष में रोजाना 365 इंजेक्शन लगाने के बजाय केवल 52 इंजेक्शन लगाने होंगे। इससे उपचार की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनने की संभावना है। कंपनी का कहना है कि लंबे समय तक प्रभावी रहने वाला यह बेसल इंसुलिन शरीर में लगातार आवश्यक स्तर पर इंसुलिन उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है, जिससे ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।




क्लीनिकल ट्रायल में मिले सकारात्मक परिणाम

नोवो नोर्डिस्क के अनुसार, वैश्विक ONWARDS-1 क्लीनिकल ट्रायल में अवीकली ने रोजाना दिए जाने वाले बेसल इंसुलिन इंसुलिन ग्लारजीन U-100 की तुलना में अच्छे परिणाम दिए। कंपनी का दावा है कि अध्ययन में इस साप्ताहिक इंसुलिन ने HbA1c (ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन) के स्तर को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने में मदद की। साथ ही मरीजों का ब्लड ग्लूकोज लंबे समय तक सुरक्षित दायरे में बना रहा। परीक्षण के दौरान अधिक मरीज गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया (ब्लड शुगर का अत्यधिक कम हो जाना) के बिना उपचार के लक्ष्यों तक पहुंच सके।




कीमत और उपलब्धता

कंपनी ने भारत में 700 यूनिट पैक की कीमत 2,611 रुपये निर्धारित की है। इस हिसाब से प्रति यूनिट लागत लगभग 3.73 रुपये पड़ती है। नोवो नोर्डिस्क का दावा है कि यह कीमत बाजार में उपलब्ध कई दैनिक बेसल इंसुलिन विकल्पों की तुलना में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक कम है। कंपनी का मानना है कि प्रतिस्पर्धी कीमत होने से अधिक मरीज इस उपचार का लाभ उठा सकेंगे।
इंजेक्शन का डर कम करने में मिल सकती है मदद

नोवो नोर्डिस्क इंडिया के प्रबंध निदेशक विक्रांत श्रोत्रिय के अनुसार, सप्ताह में केवल एक बार इंसुलिन लेने की सुविधा मरीजों के लिए उपचार को अधिक सरल बना सकती है। उन्होंने कहा कि रोजाना इंजेक्शन लगाने की आवश्यकता कई मरीजों में मानसिक दबाव, इंजेक्शन का डर और नियमित उपचार का पालन करने में कठिनाई पैदा करती है। उनके अनुसार, कम बार इंजेक्शन लेने का विकल्प मरीजों की उपचार के प्रति प्रतिबद्धता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।




विशेषज्ञों ने बताया उपयोगी विकल्प

इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के वरिष्ठ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. एस.के. वांगनू ने कहा कि अनेक मरीज रोजाना इंसुलिन इंजेक्शन लेने की आशंका के कारण उपचार शुरू करने में देरी करते हैं। इससे लंबे समय तक ब्लड शुगर अनियंत्रित रह सकती है और जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि सप्ताह में एक बार लगने वाला इंसुलिन उन मरीजों के लिए उपयोगी विकल्प साबित हो सकता है जिन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार इंसुलिन थेरेपी की आवश्यकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किस मरीज के लिए कौन-सी इंसुलिन थेरेपी उपयुक्त होगी, इसका निर्णय चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही होना चाहिए।

भारत में तेजी से बढ़ रहा है डायबिटीज का बोझ

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत में 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं, जबकि लगभग 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज की स्थिति में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में बड़ी संख्या में मरीज इंसुलिन थेरेपी शुरू करने में औसतन 7 से 9 वर्ष की देरी कर देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उपचार को सरल और सुविधाजनक बनाया जाए तो मरीज समय पर इंसुलिन थेरेपी शुरू कर सकते हैं, जिससे बीमारी पर बेहतर नियंत्रण संभव हो सकता है।

इंसुलिन क्यों है जरूरी?

इंसुलिन एक महत्वपूर्ण हार्मोन है, जो रक्त में मौजूद ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है ताकि उसे ऊर्जा के रूप में उपयोग किया जा सके। टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों में शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता, जबकि एडवांस्ड टाइप-2 डायबिटीज में भी कई मरीजों को इंसुलिन थेरेपी की आवश्यकता पड़ती है। अब तक अधिकांश मरीजों को रोजाना इंसुलिन इंजेक्शन लेना पड़ता था। सप्ताह में एक बार दिए जाने वाले इस नए बेसल इंसुलिन के आने से उपचार की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी नई दवा या इंसुलिन थेरेपी की शुरुआत केवल योग्य चिकित्सक की सलाह और नियमित निगरानी में ही की जानी चाहिए।






Editorial Team



Diabetes Newsonce weekly insulinNovo Nordiskweekly insulinType 1 diabetesType 2 diabetesblood sugardiabetes in Indiainsulin therapyHealth News









Next Story
like (0)
deltin55administrator

Post a reply

loginto write comments

Explore interesting content

No related threads available.

deltin55

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

12

Posts

1510K

Credits

administrator

Credits
152797