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'आत्मनिर्भर भारत': केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'य ...

deltin55 1970-1-1 05:00:00 views 0

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने बुधवार को आत्मनिर्भर भारत के लिए यूरिया-2026 (एनआईपीयू-2026) के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति के उर्वरक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इसकी जानकारी दी।
  प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा कि देशभर के अपने किसान भाई-बहनों के कल्याण के लिए हमारी सरकार कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। इसी कड़ी में आज राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे न सिर्फ गैस आधारित नए यूरिया उत्पादन संयंत्रों की स्थापना के लिए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता के संकल्प को भी नई मजबूती मिलेगी।




  यह नीति देश में गैस आधारित यूरिया विनिर्माण इकाईयां लगाने के लिए यूरिया सेक्टर में नए निवेश को बढ़ावा देगी। इससे आत्मनिर्भरता का लक्ष्य पाने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त, एनआईपी-2012 की तुलना में मुख्य बदलावों में अधिक पारदर्शिता के लिए फिक्स्ड और वेरिएबल लागत को अलग करना, 12 प्रतिशत की फ्लोर और 16 प्रतिशत की सीलिंग के साथ एक वायबल रिटर्न ऑन इक्विटी (आरओई) बैंड शुरू करना और विद्यमान विनिमय दरो के आधार पर चार साल बाद फिक्स्ड कॉस्ट को आईएनआर में बदलकर फॉरेन एक्सचेंज जोखिम को कम करना शामिल है। इन उपायों से एनआईपी-2012 की तुलना में एनआईपीयू-2026 के तहत लगाए गए हर प्लांट के लिए 250 करोड़ रुपए से अधिक की बचत होने का अनुमान है।




  नई यूरिया विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को आत्मनिर्भर भारत के लिए यूरिया-2026 (एनआईपीयू-2026) के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति के तहत कवर किया जाएगा।
  यूरिया सेक्टर में नए निवेशों को आकर्षित करने के लिए, उर्वरक विभाग ने 2012 में यूरिया सेक्टर में पुनरुत्थान, विस्तार, रिवाईवल/ब्राउनफील्ड, एवं ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के लिए निवेश के लिए एक नीति को अंतिम रूप दिया था। नई निवेश नीति (एनआईपी) – 2012 के तहत, कुल 6 नई यूरिया इकाइयां स्थापित की गई हैं, जिनमें नामांकित पीएसयू की संयुक्त उद्यम कंपनियों (जेवीसी) के द्वारा बनाई गई 4 यूरिया इकाइयां और निजी कंपनियों द्वारा स्थापित 2 यूरिया इकाइयां शामिल हैं। एनआईपी-2012 के तहत नए निवेश की अवधि अक्टूबर-2019 तक समाप्त हो गई।




  वर्तमान में, 269.42 एलएमटी की कुल रीअसेस्ड/इंस्टॉल्ड क्षमता के साथ यूरिया विनिर्माण की 33 यूनिट प्रचालनगत हैं। यूरिया का स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता है। देश में यूरिया के स्वदेशी उत्पादन और मांग में एक अंतराल है जिसे यूरिया के आयात से पूरा किया जाता है। उर्वरक विभाग को यूरिया इकाइयां स्थापित करने के लिए कई प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इसलिए, यूरिया के लिए एक राष्ट्रीय निवेश नीति आवश्यक है।






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