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राहुल गांधी की गुरिल्ला पॉलिटिक्स!

deltin55 Yesterday 02:52 views 7

               

विश्व दीपक-







राहुल की गुरिल्ला पॉलिटिक्स… When in Rome, do as the Romans do





कहावत पुरानी है. संदर्भ नया. रोम में रहते हुए भी राहुल गांधी रोमन की तरह व्यवहार नहीं करते थे. लोग उन्हें पप्पू समझने लगे. अब जबकि वो रोमन की तरह व्यवहार लगे हैं तो लोगों को लगता है कि बेवजह आक्रामक हो रहे हैं.





पिछले दिनों जब राहुल संसद के अंदर थे तो पीएम आये ही नहीं भाषण देने. कल संसद के बाहर आये तो रील मंत्री अश्वनी वैष्णव भाग निकले.







सत्ता पक्ष उम्मीद कर रहा था कि राहुल राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलेंगे. राहुल ने खोल दिया लद्दाख में चीन का घुसपैठ वाला पन्ना. इस गुरिल्ला पॉलिटिक्स का असर सर्जिकल स्ट्राइक जैसे हुआ. पूरा ट्रेजरी बेंच तितर-बितर नज़र आया.







फिर अगले दिन संसद में किताब लेकर पहुंच गये. मीडिया के सामने नरवणे की आत्मकथा लहरा दी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सारे दावे भक्क हो गये. राहुल की गुरिल्ला पॉलिटिक्स काम कर रही है. सत्ता पक्ष का डिफेंस बिखर चुका है. आक्रमण तो भूल ही जाइए. इस बजट सत्र में सत्ता पक्ष पूरी तरह से बेदम दिखा.







पांच साल पहले राहुल गांधी से तरह आक्रामक गुरिल्ला पॉलिटिक्स की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था. इसकी वजह उनकी परवरिश और सत्ता की समझ में निहित है.





दादी और पिता की हत्या ने राहुल के मन पर बहुत गहरा और बुरा असर डाला है. उनके सार्वजनिक व्यवहार की स्क्रूटनी करने से पहले इस पक्ष को ध्यान में रखना चाहिए. पब्लिक इंटरैक्शन में उनके अंदर जो एक झिझक दिखती थी यह उसी वजह से था. हालांकि अब वह काफी हद तक दूर हो चुकी है.





दूसरी बात है सत्ता. सत्ता राहुल गांधी की चेरी रही है. जिसके घर में तीन-तीन प्रधानमंत्री रहे हों, जिसके परिवार ने भारत ही नहीं बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप की किस्मत का फैसला किया हो स्वाभाविक है उसे सत्ता हवस नहीं होगी. चाहत हो सकती है. वह व्यक्ति सत्ता पाने के लिये वही तरीके नहीं अपनाएगा जो दशकों से भूखे-नंगे लोग अपना सकते हैं.





पॉवर पॉलिटिक्स को लेकर राहुल के अंदर जो सचेतन दुराव दिखता है उसकी वजह यही मानसिकता है. पर अब वो इस मानसिकता से भी बाहर निकल चुके हैं. अब वो सत्ता पक्ष के ऊपर वहां से हमला करते हैं जहां से उनको उम्मीद भी नहीं होती. राहुल की गुरिल्ला पॉलिटिक्स यही है.







रील मंत्री अश्वनी वैष्णव मीडिया के सामने हांक रहे थे. राहुल ने लाइव ट्रॉलिंग कर दी. वैष्णव ने कभी कल्पना नहीं की होगी कि राहुल इस तरह ऑन कैमरा उनसे उनका स्पेस छीन लेंगे.





जब दुश्मन बहुत मज़बूत हो, सारे संसाधनों पर उसका नियंत्रण हो, मीडिया उसका गुलाम हो. वह कारपोरेट की जेब में और कारपोरेट उसके दिमाग में रहता हो तो गुरिल्ला पॉलिटिक्स ही काम आती है.




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