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राम मंदिर चंदा गबन मामले में निर्मोही अखाड़ ...

deltin55 1970-1-1 05:00:00 views 14

नई दिल्ली। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित चंदा गबन मामले और मंदिर प्रबंधन को लेकर निर्मोही अखाड़ा एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अखाड़े ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन, उसके वित्तीय लेनदेन की फोरेंसिक ऑडिट और मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई मुद्दों पर अदालत से निर्देश देने का आग्रह किया है। इस मामले से जुड़ी कुछ याचिकाओं पर विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच की मांग को लेकर 20 जुलाई को सुनवाई प्रस्तावित है।




  निर्मोही अखाड़ा ने अपनी याचिका में कहा है कि वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अयोध्या भूमि विवाद पर फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार को राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया था। लेकिन, अखाड़े का दावा है कि फैसले की भावना के अनुरूप ट्रस्ट का गठन और संचालन नहीं किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को एक सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में पुनर्गठित किया जाए। साथ ही ट्रस्ट के सभी वित्तीय और संपत्ति संबंधी लेनदेन की स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट कराई जाए, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता की निष्पक्ष जांच हो सके।




  निर्मोही अखाड़े ने हाल ही में राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और बहुमूल्य वस्तुओं के कथित गबन के आरोपों का भी उल्लेख किया है। अखाड़े का कहना है कि इन आरोपों की जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया है। ऐसे में ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड और संपत्तियों की विस्तृत जांच भी जरूरी है। याचिका में यह भी कहा गया है कि ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े के लिए निर्धारित प्रतिनिधित्व उसकी परंपरा और नियमों के अनुसार नहीं दिया गया। अखाड़े ने महंत दिनेंद्र दास के नामांकन पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि उनका चयन निर्धारित प्रक्रिया के तहत नहीं हुआ।




  मूर्ति स्थापना के मुद्दे पर भी अखाड़े ने आपत्ति दर्ज कराई है। उसका कहना है कि गर्भगृह में नई मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा से मूल विवाद की स्थिति बदल गई है। इसलिए वर्ष 1950 और 1982 से स्थापित मूल विग्रहों को फिर से गर्भगृह में स्थापित करने का निर्देश दिया जाए।
  हालांकि, निर्मोही अखाड़े ने स्पष्ट किया है कि वह सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2019 के ऐतिहासिक फैसले को चुनौती नहीं दे रहा है। उसका उद्देश्य केवल फैसले के सही क्रियान्वयन, ट्रस्ट की जवाबदेही, पारदर्शिता और मंदिर प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर न्यायालय से आवश्यक निर्देश प्राप्त करना है।






Deshbandhu











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