16 जवान शहीद: चार महीने से जारी संघर्ष और भीषण
- ड्रोन-मिसाइलों का कहर: अमेरिका-ईरान की जंग आसमान में
- संसार भर में तबाही: नागरिक और मजदूर भी बने शिकार
- ट्रंप खामोश: ताजा मौतों पर अब तक कोई बयान नहीं
वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में चार महीने से जारी संघर्ष और भीषण होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने शनिवार को पुष्टि की कि जॉर्डन में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों का मुकाबला करते हुए उनके दो सैनिक मारे गए हैं। इस ताजा घटना के बाद अब तक इस युद्ध में जान गंवाने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या 16 हो गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि एक सैनिक अभी भी लापता है।
ड्रोन और मिसाइलों से लड़ा जा रहा युद्ध
विशेष बात यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई बड़ी जमीनी लड़ाई नहीं हो रही है। यह संघर्ष मुख्य रूप से ड्रोन, मिसाइल और हवाई हमलों के जरिए लड़ा जा रहा है। शांति वार्ता टूटने के बाद से ईरान और उसके सहयोगी गुट अमेरिकी सैनिकों को लगातार निशाना बना रहे हैं।
अब तक कहां-कहां हुईं मौतें
- कुवैत: 28 फरवरी को ड्रोन हमले में 6 सैनिक मारे गए।
- सऊदी अरब: प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर घायल एक सैनिक ने इलाज के दौरान दम तोड़ा।
- इराक: मार्च के अंत में KC‑135 विमान क्रैश में 6 सैनिकों की मौत।
- अरब सागर: 1 जुलाई को अमेरिकी नौसेना का हेलीकॉप्टर क्रैश, एक पायलट की मौत।
- जॉर्डन: ताजा मिसाइल और ड्रोन हमले में 2 सैनिक मारे गए।
राष्ट्रपति ट्रंप का रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए यह युद्ध जरूरी है। हालांकि, ताजा मौतों पर शनिवार दोपहर तक उनका कोई सीधा बयान सामने नहीं आया।
नागरिकों और अन्य देशों का नुकसान
ईरान का दावा है कि अमेरिकी हमलों में पिछले तीन हफ्तों में उसके 50 से ज्यादा नागरिक मारे गए और 500 से अधिक घायल हुए हैं। खाड़ी देशों, इजरायल और लेबनान में काम करने वाले आम नागरिक और विदेशी मजदूर भी इस संघर्ष की चपेट में आ रहे हैं।

Deshbandhu
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