वॉशिंगटन: अमेरिका ने भारत सहित 60 देशों से आयात होने वाले चुनिंदा उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने ट्रेड एक्ट-1974 की धारा 301 के तहत यह कदम उठाया है। शुक्रवार से प्रभावी हुए इस फैसले के तहत भारत से आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से बने उत्पादों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से की गई है।
60 देशों पर अलग-अलग दरों से लगाया गया टैरिफ
USTR की अधिसूचना के अनुसार कुल 60 देशों को इस कार्रवाई के दायरे में रखा गया है। इनमें 17 देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है, जबकि शेष 43 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लागू किया गया है। भारत उन देशों में शामिल है जिन्हें अपेक्षाकृत कम दर वाले समूह में रखा गया है। भारत के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, मेक्सिको, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों पर भी 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन देशों ने फोर्स्ड लेबर से जुड़े उत्पादों पर रोक लगाने या श्रम मानकों को बेहतर बनाने की दिशा में कुछ ठोस कदम उठाए हैं।
भारतीय निर्यातकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार माना जाता है। ऐसे में अतिरिक्त आयात शुल्क का सीधा असर उन उद्योगों पर पड़ सकता है जिनकी अमेरिकी बाजार में मजबूत हिस्सेदारी है। टैरिफ बढ़ने से भारतीय उत्पादों की कीमत अमेरिकी बाजार में बढ़ सकती है, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त लागत का दबाव भारतीय निर्यातकों को या तो कीमतें घटाने के लिए मजबूर कर सकता है या फिर अमेरिकी आयातक वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर सकते हैं।
इन सेक्टरों पर पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर
नई टैरिफ व्यवस्था का सबसे अधिक प्रभाव टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग पर पड़ने की संभावना है। इसके अलावा जेम्स एंड ज्वेलरी, चमड़ा एवं लेदर उत्पाद, कृषि और खाद्य उत्पाद, इंजीनियरिंग गुड्स, रसायन उद्योग तथा अन्य विनिर्माण उत्पादों पर भी दबाव बढ़ सकता है। इन क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार पर निर्भर है। अतिरिक्त शुल्क लागू होने से निर्यात लागत बढ़ेगी, जिससे ऑर्डर और मुनाफे दोनों पर असर पड़ सकता है।
भारत को 12.5% की बजाय 10% टैरिफ क्यों मिला शुरुआती प्रस्ताव में अमेरिका भारत पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी में था। हालांकि बाद में यह दर घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई। अमेरिकी फेडरल नोट के अनुसार भारत सरकार ने जून में अपनी विदेशी व्यापार नीति में संशोधन किया और श्रमिक अधिकारों, सप्लाई चेन की निगरानी तथा पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए। अमेरिकी प्रशासन ने इन सुधारों को सकारात्मक माना और इसी आधार पर भारत को 2.5 प्रतिशत की राहत दी गई। हालांकि अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूर्ण छूट नहीं है और भविष्य में श्रम मानकों के प्रभावी अनुपालन पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।

Editorial Team
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