जौनपुर में मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने किसानों की बदहाल होती आर्थिक स्थिति, बढ़ती खेती लागत, लंबित गन्ना भुगतान और केंद्र सरकार के अधूरे वादों को लेकर कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है। किसानों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित मुक्त व्यापार समझौतों पर भी चिंता जताते हुए कहा कि यदि कृषि और डेयरी क्षेत्र को बिना सुरक्षा के विदेशी कंपनियों के लिए खोल दिया गया तो इसका सबसे बड़ा नुकसान छोटे और सीमांत किसानों को उठाना पड़ेगा।
कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान, सरकार के नाम सौंपा मांगों का ज्ञापन
मंगलवार दोपहर करीब दो बजे भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले बड़ी संख्या में किसान, कृषि मजदूर और ग्रामीण समाज से जुड़े लोग जौनपुर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नारेबाजी की और बाद में अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।

बीकेयू के प्रदेश सचिव राजनाथ यादव ने कहा कि देश का कृषि क्षेत्र इस समय गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा। कई राज्यों में गन्ना किसानों का भुगतान अब भी लंबित है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
महंगी खेती, प्राकृतिक आपदाएं और उर्वरकों की कमी ने बढ़ाई मुश्किलें
बीकेयू नेताओं ने कहा कि डीजल, बिजली, बीज, उर्वरक और कृषि यंत्रों की बढ़ती कीमतों ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है। समय पर खाद उपलब्ध न होने से किसान फसल की बुवाई और उत्पादन दोनों में प्रभावित हो रहे हैं।
संगठन ने यह भी कहा कि बाढ़, अतिवृष्टि, सूखा और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने देश के कई हिस्सों में किसानों की कमर तोड़ दी है। फसलें बर्बाद होने के बावजूद अधिकांश किसानों को समय पर पर्याप्त राहत नहीं मिल पाती, जिससे उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
किसान बोले- विदेशी आयात से कमजोर होगी कृषि
भारतीय किसान यूनियन ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। संगठन का कहना है कि यदि कृषि और डेयरी क्षेत्र को बिना पर्याप्त सुरक्षा के विदेशी कॉरपोरेट कंपनियों के लिए खोल दिया गया तो इसका सीधा असर देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों तथा दुग्ध उत्पादकों पर पड़ेगा।
बीकेयू नेताओं का कहना है कि भारी सब्सिडी प्राप्त विदेशी कृषि उत्पादों के आयात से भारतीय किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा। इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) व्यवस्था, सार्वजनिक खरीद प्रणाली और देश की खाद्य सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
'2021 के वादे अब तक अधूरे', आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान संगठन ने केंद्र सरकार को 9 दिसंबर 2021 को संयुक्त किसान मोर्चा के साथ हुए लिखित समझौते की भी याद दिलाई। किसानों का कहना है कि उस समय सरकार ने कई महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति जताई थी, लेकिन आज तक उनका पूर्ण क्रियान्वयन नहीं हो सका है।

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