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हरियाणा में हो रही यूरेनियम की खोज, 12 से अधिक गांवों में तेजी से चल रहा ड्रिलिंग और टेस्टिंग का फेज

deltin33 2025-10-14 03:36:51 views 1241
  

मैग्नेटाइट और ऐलबिटाइज़्ड कैल्क-सिलिकेट रॉक।  



जागरण संवाददाता, नारनौल।  विकसित भारत के विकास की परिसंकल्पना में नारनौल के साथ लगते करीब एक दर्जन गांव बड़ी भूमिका निभाने को तैयार हैं। इन गांवों में यूरेनियम के अन्वेषण कार्य का ड्रिलिंग और टेस्टिंग फेज में चल रहा है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

परमाणु ऊर्जा विभाग के परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय के प्रयास रंग लाते नजर आ रहे हैं और आने वाले समय में यह क्षेत्र देश के ही नहीं, बल्कि विश्व के मानचित्र पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब होगा।

वैसे भी विकसित राष्ट्र के लिए उसकी बिजली की खपत का एक मापदंड पूरा करना होता है। इसके लिए बिजली का उत्पादन और खपत दोनों को बढ़ाना जरूरी है। भूवैज्ञानिक इस क्षेत्र में क्रिटिकल मिनरल्स की संभावना भी तलाश रहे हैं और आश्वस्त भी नजर आ रहे हैं।

सोमवार को जिले के गांव दौचाना स्थित राजवंशी स्कूल में विभाग की ओर से किसानों और जनप्रतिनिधियों को परमाणु ऊर्जा को लेकर जागरूक करने के लिए कैंप आयोजित किया गया। इसमें विभाग के सेवानिवृत अपर निदेशक एवं कोऑर्डिनेटर ओमप्रकाश यादव, उतरी क्षेत्र इंचार्ज एके पाठक, उपक्षेत्रीय निदेशक राकेश मोहन, ड्रिलिंग प्रभारी रामअवधराम व अन्य भू वैज्ञानिक और अधिकारी मौजूद रहे।

इस दौरान क्षेत्र की पहाड़ियों में मिले उभयचर,शिट्स, मैग्नेटाइट,एल्बिटाइज्ड कैल्क-सिलिकेट चट्टान, क्वार्टाइज की चट्ठानों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। ओमप्रकाश यादव ने कहा कि यूरेनियम ऊर्जा का सबसे बड़ा स्त्रोत होता है।

तीन हजार टन कोयले के बराबर एक किलो यूरेनियम बिजली बनाता है। इससे स्वच्छ हरित ऊर्जा उत्पादित होती है। विकसित भारत के लिए बिजली खपत के मापदंड को पूरा करना होगा। अमेरिका जैसे विकसित देशों के बराबर बिजली खपत के मापदंड के लिए जरूरी है कि हमें अधिक से अधिक बिजली बनाने के स्त्रोत खोजने होंगे।

हरियाणा के फतेहाबाद जिले में परमाणु संयंत्र लगा हुआ है। बिजली उत्पादन में कच्चे मैटेरियल तलाशने होंगे। आने वाले समय में नारनौल के आसपास के गांव दौचाना, रायपुर, मोहनपुर, जाखनी, बदोपुर, भाखरी, शिमला, जादूपुर गांव की बेल्ट विकसित भारत बनाने में अहम भूमिका निभाने वाली है।

वर्तमान में हमारे देश की बिजली जरूरत की सर्वाधिक आवश्यकता कोयला आधारित पूरी करती है, लेकिन विकसित भारत के लक्ष्य को आने वाले वर्षों तक परमाणु आधारित बिजली को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस क्षेत्र में यूरेनियम का सर्वेक्षण पहली बार हवाई सर्वेक्षण 2020 में किया गया था।

इसके बाद अधोसतही अन्वेषण किया गया और अब बोर (ड्रिलिंग) कर चट्टानों का अध्ययन किया जा रहा है। हालांकि इसकी प्रक्रिया काफी लंबी है। यूरेनियम का उपयोग केवल बम बनाने और सुरक्षा के लिए ही नहीं होता है, बल्कि इसका शांति कार्यों में सर्वाधिक होता है।

उतरी क्षेत्र इंचार्ज एके पाठक ने बताया कि यूरेनियम का इस्तेमाल बिजली बनाने, मेडिकल के क्षेत्र में कैंसर ठीक करने के इंस्ट्रूमेंट बनाने, परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा सेना के जवानों के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने और यहां तक की देश की चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम और वीवीपेट में उपयोग होता है।

उन्होंने खुशी जाहिर की कि यह क्षेत्र यूरेनियम को लेकर तो अच्छी संभावनाओं वाला तो है ही, साथ ही आज के वर्तमान दौर में क्रिटिकल अर्थ को लेकर चल रही वैश्विक दौड़ में भारत को विकसित करने की भूमिका भी निभाएगा।

उपक्षेत्रीय निदेशक राकेश मोहन ने कहा कि विकसित भारत की इस संकल्पना में क्षेत्रवासियों का सहयोग बहुत जरूरी है। इस सहयोग के बगैर यह संकल्पना पूरी होना मुश्किल है।

इस अवसर पर शिक्षाविद डाॅ. आरएन यादव,विद्यालय के प्रबंधक दिनेश कुमार व क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे। पावर प्वाॅइंट और प्रदर्शनी के माध्यम स्कूली बच्चों व ग्रामीणों को जागरूक किया गया।

यह भी पढ़ें- नारनौल में बेकाबू कार का कहर, तेज रफ्तार में दुकानों में घुसी और ड्राइवर को पकड़ पुलिस के हवाले किया
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