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बिहार चुनाव: सीटों की जंग ने बढ़ाई महागठबंधन की टेंशन, VIP को तेजस्वी का आखिरी अल्टीमेटम

Chikheang 2025-10-16 18:07:28 views 1265
  
सीटों की जंग ने बढ़ाई महागठबंधन की टेंशन






डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के नामांकन की डेडलाइन में अब सिर्फ 31 घंटे बचे हैं, और इस बीच महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं दिख रहा है। तेजस्वी यादव बनाम मुकेश सहनी की खींचतान अब अल्टीमेटम तक पहुंच चुकी है — और अगर सहनी नहीं माने, तो VIP की घर वापसी से पहले ही दरवाज़ा बंद हो सकता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

  
सीटों पर तकरार, गठबंधन पर संकट

सूत्रों के मुताबिक़, विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में कम से कम 24 सीटों की मांग रखी है। लेकिन RJD नेता तेजस्वी यादव अब ज़्यादा झुकने को तैयार नहीं। उन्होंने साफ कर दिया है कि VIP को 15 सीटों से ज्यादा नहीं मिलेंगी।

महागठबंधन के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, बातचीत अब “ब्रेकिंग पॉइंट“ पर है। अगर सहनी कुछ सीटों पर पीछे हटते हैं तो डील पक्की हो सकती है, लेकिन अगर नहीं माने तो VIP की विदाई तय मानी जा रही है।

इतिहास दोहराएगा खुद को?

गौरतलब है कि 2020 के चुनाव में भी सहनी महागठबंधन से नाराज़ होकर NDA में चले गए थे। वहां उन्हें 11 सीटें मिलीं, जिनमें से उन्होंने 4 जीतीं। लेकिन बाद में तीन विधायक BJP में शामिल हो गए और एक की मृत्यु हो गई। इसके बाद सहनी की VIP अकेली पड़ गई और उन्होंने NDA से भी किनारा कर लिया।

“डिप्टी सीएम बनूंगा“, सहनी के सपनों पर भी सवाल

हाल ही में मुकेश सहनी ने दावा किया था कि अगर महागठबंधन की सरकार बनी तो वे डिप्टी सीएम होंगे। जब उनसे पूछा गया कि कुछ सहयोगी उनके इस दावे से खुश नहीं हैं, तो उन्होंने पलटकर कहा:

“अगर कुछ लोग तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री नहीं मानते, तो क्या बिहार बिना मुख्यमंत्री के चलेगा? अगर तेजस्वी मुख्यमंत्री बन सकते हैं, तो मैं डिप्टी सीएम क्यों नहीं?”

उन्होंने ये भी जोड़ा कि BJP भी मानती है कि वे डिप्टी सीएम बनने लायक हैं, और “जहां सहनी जाते हैं, वहीं सरकार बनती है।”

तेजस्वी की ‘लक्ष्मण रेखा’

लेकिन इस बार तेजस्वी यादव पहले की तरह झुकते नहीं दिख रहे। VIP की मांगों पर अब एक सख्त अल्टीमेटम दिया गया है। महागठबंधन के सूत्र NDTV को बताते हैं कि “अब या तो सहनी माने, या गठबंधन से बाहर हों।“

सहनी की ताकत और सीमाएं

2018 में बनी VIP का असर खासकर निषाद, मल्लाह और नाविक समुदायों में माना जाता है। सहनी को हमेशा से \“सीटों के सौदेबाज़\“ के रूप में देखा गया है, लेकिन बार-बार पाले बदलने से उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते रहे हैं।

अब सवाल यह:

  

क्या सहनी इस बार भी अंतिम समय पर गठबंधन बदलेंगे?

या तेजस्वी यादव की सख्ती के सामने झुककर VIP एक बार फिर महागठबंधन में अपनी जगह बचा पाएगी?
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