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अन्नकूट पर मणि मंदिर में सजेगी घर की रसोई, श्रीअन्न से बने व्यंजनों का लगेगा भोग

cy520520 2025-10-17 16:38:22 views 795
  

भक्तों द्वारा घर की रसोई में बने विविध पकवान प्रभु को भोग के रूप में अर्पित किए जाएंगे।



जागरण संवाददाता, वाराणसी। अन्नकूट के अवसर पर दुर्गाकुण्ड स्थित मणि मंदिर (धर्मसंघ) में घर की रसोई सजायी जाएगी। भक्तों द्वारा घर की रसोई में बने विविध पकवान प्रभु को भोग के रूप में अर्पित किए जाएंगे।

धर्मसंघ के महामंत्री पं. जगजीतन पाण्डेय ने बताया कि अन्नकूट पर्व पर 2022 से यह परंपरा शुरू हुई, जिसमें अब काशी के धर्मनिष्ठ गृहस्थों द्वारा घर की रसोई से ठाकुर जी को विविध व्यंजनों का भोग बनाया जाएगा। पिछले वर्ष लगभग पाँच हजार भक्तों ने घर की बनी रसोई प्रभु को अर्पित की थी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस बार भी भक्तों में अन्नकूट के लिए खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। बड़ी संख्या में भक्तगण थाली के लिए मंदिर आ रहे हैं, जिससे इस बार और अधिक श्रद्धालुओं के इस अनूठे आयोजन से जुड़ने की उम्मीद है।

मंदिर की तरफ से लगेगा 151 क्विंटल प्रसाद का भोग- अन्नकूट के अवसर पर मंदिर की तरफ से धर्मसंघ में 151 क्विंटल प्रसाद का भोग लगाया जाएगा। भोग में छप्पन प्रकार के व्यंजनों से प्रभु की छप्पन भोग झाँकी सजाई जाएगी।

मंदिर मंडप में लड्डुओं से मंदिर का भव्य ढाँचा सबके आकर्षण का केंद्र रहेगा। इसके साथ ही जगजीतन पाण्डेय ने बताया कि इस बार ठाकुर जी को विशेष रूप से श्रीअन्न (मोटे अनाज) से बने लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। इसमें बाजरे, कोदे, साँवाँ, मक्का से बने व्यंजन शामिल होंगे।

पाँच दिनों तक होंगे विविध अनुष्ठान- दीपावली के अवसर पर मणि मंदिर में धन त्रयोदशी से ही धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हो जाएंगे, जो कि अन्नकूट तक चलेंगे। इस मौके पर मंदिर परिसर को भव्यता प्रदान करने के लिए कारीगरों की टीम दिन-रात फूल मालाओं, विद्युत झालरों और बंदनवार सजाने में जुटी हुई है।

इस आयोजन का उद्देश्य न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ावा देना है, बल्कि समाज में एकता और सहयोग की भावना को भी प्रोत्साहित करना है। भक्तों की सहभागिता से यह पर्व और भी विशेष बन जाता है। अन्नकूट के इस पर्व पर सभी भक्तों को आमंत्रित किया गया है कि वे अपने घरों से बनाए गए व्यंजनों को लेकर आएं और प्रभु को अर्पित करें।

मणि मंदिर में अन्नकूट का यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह काशी की सांस्कृतिक धरोहर को भी उजागर करता है। भक्तों की आस्था और श्रद्धा से यह पर्व और भी भव्यता से मनाया जाएगा। सभी भक्तों से अपील की गई है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और अपने परिवार के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लें।
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