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पटना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय को मिला नर्सिंग पाठ्यक्रमों की परीक्षा और संबद्धता का अधिकार

deltin33 2025-10-19 08:06:31 views 1272
  

बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय को परीक्षा लेने का अधिकार। फाइल फोटो



विधि संवाददाता, जागरण, पटना। पटना हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न निजी नर्सिंग संस्थानों द्वारा दायर उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय को एएनएम और जीएनएम पाठ्यक्रमों की परीक्षा एवं संबद्धता का अधिकार देने के सरकारी आदेश को चुनौती दी गई थी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

न्यायाधीश हरीश कुमार की एकल पीठ ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम, 2021 के तहत गठित विश्वविद्यालय को पूरे राज्य में स्वास्थ्य विज्ञान से संबंधित सभी संस्थानों की परीक्षा आयोजित करने और संबद्धता देने का वैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि यह अधिनियम सभी पूर्ववर्ती नियमों पर प्रभावी होगा, क्योंकि यह विशेष रूप से स्वास्थ्य शिक्षा में एकरूपता लाने और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।

याचिकाकर्ता संस्थानों की ओर से वरीय अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने तर्क दिया था कि बिहार नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल ही नर्सिंग पाठ्यक्रमों की संबद्धता और परीक्षा लेने की प्राधिकृत संस्था है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नर्सिंग परिषद अधिनियम, 1947 की अनुसूची में बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का नाम नहीं है, इसलिए यह विश्वविद्यालय परीक्षा नहीं ले सकता।

राज्य की ओर से महाधिवक्ता पी.के. शाही ने इसका विरोध करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अधिनियम के लागू होने के बाद सभी नर्सिंग, पारामेडिकल, डेंटल, फार्मेसी और संबद्ध स्वास्थ्य पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के अधीन होंगे।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के नूतन कुमारी बनाम बिहार राज्य और कर्नाटक स्टेट एसोसिएशन आफ नर्सिंग इंस्टीट्यूट्स बनाम इंडियन नर्सिंग काउंसिल के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय नर्सिंग परिषद को एएनएम कोर्स की मान्यता देने का अधिकार नहीं है, यह अधिकार राज्य सरकार का है।

कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय का अधिकार क्षेत्र पूरे बिहार में लागू होगा और यह नर्सिंग पाठ्यक्रमों की परीक्षा और संबद्धता के लिए सक्षम संस्था है।

साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि किसी भी छात्र को याचिका लंबित रहने के कारण परीक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने याचिका को बिना किसी आधार के बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि राज्य सरकार छात्रों के हित में परीक्षा प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करे।
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