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हरियाणा कांग्रेस में गुजबाजी पर लगाम कसने के लिए सख्त हुए राव नरेंद्र, अनुशासन कमेटी बनाने के लिए हाईकमान को भेजा प्रस्ताव

LHC0088 2025-10-19 14:37:18 views 708
  

हरियाणा कांग्रेस में गुजबाजी पर लगाम कसने के राव नरेंद्र ने अनुशासन कमेटी बनाने के लिए हाईकमान को भेजा प्रस्ताव (फाइल फोटो)



राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। गुटबाजी से जूझ रही हरियाणा कांग्रेस में अब अनुशासन के लिए कड़े कदम उठाने की तैयारी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह की पहल पर अनुशासन कमेटी के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रस्ताव पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेजा जा चुका है। हरियाणा मामलों के प्रभारी बीके हरिप्रसाद के माध्यम से प्रस्ताव हाईकमान तक पहुंचा है, जिसे मंजूरी मिलते ही कमेटी का औपचारिक गठन होगा।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इसके बाद शुरू होगा वह दौर, जो कई नेताओं के लिए असहज भी हो सकता है। राव की नजर अनुभवी और तटस्थ चेहरों पर है। अनुशासनात्मक कार्रवाई कमेटी में पूर्व नौकरशाह, वरिष्ठ वकील और पुराने संगठन कार्यकर्ताओं को जगह दी जा सकती है। कमेटी में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन का भी ध्यान रखा जाएगा ताकि कोई यह न कह सके कि विशेष लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

व्यवस्था बनेगी कि पार्टी में आदेश ऊपर से आए और सवाल नीचे से नहीं हों। संदेश साफ है कि अब संगठनात्मक अनुशासन पर कोई समझौता नहीं होगा। हाईकमान भी हरियाणा में इस प्रयोग को लेकर गंभीर है, क्योंकि राज्य में कांग्रेस पहले ही अंदरूनी मतभेदों के कारण चुनावी नुकसान झेल चुकी है।

यदि यह कमेटी सक्रिय रूप से काम करती है तो यह आने वाले समय में टिकट वितरण और रणनीतिक फैसलों पर भी प्रभाव डाल सकती है। राव का साफ कहना है कि ‘हमारा किसी से व्यक्तिगत विवाद नहीं, लेकिन पार्टी मंच किसी की निजी सभा नहीं। बात करनी है तो एकांत में करें, प्रेस या पब्लिक के सामने नहीं।’ यह बयान पूरे संगठन के लिए एक ‘मैसेज’ माना जा रहा है कि कांग्रेस में अब बागी तेवर और सार्वजनिक बयानबाजी पर लगाम लगाई जाएगी।

दरअसल हरियाणा कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती संगठन नहीं, गुटबाजी है। कभी भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कभी कुमारी सैलजा तो कभी रणदीप सुरजेवाला, हर दौर में एक से ज्यादा ‘पावर सेंटर’ रहे हैं। अब जब कमान राव नरेंद्र सिंह के पास है, तो वे ‘नया संतुलन’ बनाने में जुटे हैं।

राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं - क्या यह अनुशासन कमेटी संगठन को एकजुट करेगी या किसी गुट को किनारे लगाने का जरिया बनेगी? एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘अनुशासन की आड़ में नए समीकरण बन रहे हैं। यह तय करेगा कि असली नियंत्रण किसके पास रहेगा - प्रदेश अध्यक्ष या पुराने पॉवर सेंटर्स।’

मल्लिकार्जुन खरगे और बीके हरिप्रसाद की मंजूरी के बाद ही अनुशासनात्मक कार्रवाई कमेटी का औपचारिक गठन होगा। परंतु इतना तय है कि राव नरेंद्र ने राजनीतिक संदेश भेज दिया है - अब कांग्रेस हरियाणा में ‘डर से नहीं, अनुशासन से’ चलेगी। यह कदम राजनीतिक शुचिता के साथ-साथ शक्ति संतुलन की नई परिभाषा लिख सकता है।

अगर अनुशासन के नाम पर निष्पक्षता बरती गई तो संगठन मजबूत होगा। लेकिन अगर यह एक गुट को साधने का औजार बना तो यह ‘एकता की बजाय असंतोष को जन्म दे सकता है। फिलहाल कांग्रेस दफ्तरों में फुसफुसाहट एक ही है कि ‘अनुशासन कमेटी आ रही है, अब किसकी बारी?’
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