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Kedarnath Door Close: आज बंद हो जाएंगे केदारनाथ धाम के कपाट, छह माह के लिए सूनी हो जाएगी केदारघाटी

cy520520 2025-10-23 10:38:10 views 1244
  

केदारनाथ मंदिर के कपाट आज बंद किए जाएंगे। जागरण



जागरण संवाददाता, रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम में कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस कड़ी में बुधवार को बाबा केदार की पंचमुखी भोगमूर्ति को डोली में विराजमान किया गया। इससे पहले मुख्य पुजारी बागेश लिंग ने भोगमूर्ति की विशेष पूजा-अर्चना कर भोग लगाया। जैसे ही भगवान की डोली मंदिर परिसर में पहुंची, भक्तों के जयकारों से वातावरण शिवमय हो गया। भक्तों ने डोली के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मंदिर की एक परिक्रमा के बाद डोली को सभा मंडप में विराजमान किया गया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी वाईएस पुष्पवाण ने बताया कि परंपरा अनुसार गुरुवार को भैयादूज पर सुबह 8:30 बजे मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके बाद भगवान की डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर के लिए रवाना होगी, जहां शीतकाल के छह माह तक नित्य पूजा संपन्न की जाएंगी। पहले दिन डोली रात्रि प्रवास के लिए रामपुर पहुंचेगी, जहां से अगले दिन प्रस्थान कर रात्रि प्रवास के लिए विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी और 25 अक्टूबर को गुप्तकाशी से प्रस्थान कर ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचेगी। जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग प्रतीक जैन ने बताया कि कपाट बंद होने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
छह माह तक गौरी गांव में होगी मां गौरा माई की पूजा-अर्चना

रुद्रप्रयाग: केदारनाथ यात्रा के प्रमुख पड़ाव गौरीकुंड में मां गौरा माई के कपाट भी गुरुवार को भैयादूज पर सुबह आठ बजे वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने के बाद मां की डोली मंदिर की एक परिक्रमा कर गौरी गांव के लिए प्रस्थान करेगी। शीतकाल के छह माह तक मां गौरा माई की पूजा-अर्चना यहीं संपन्न होगी। मान्यता है कि भगवान शिव की डोली गौरीकुंड पहुंचने से पहले मां गौरा माई की डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल के लिए रवाना हो जाती है। यहां भगवान शिव के गणेश से युद्ध करने और उनका सिर काटने से गौरा माई नाराज हुई थीं।
दोपहर 12:30 बजे बंद होंगे यमुनोत्री धाम के कपाट

गंगोत्री धाम के बाद यमुनोत्री धाम के कपाट भी भैया दूज पर गुरुवार को दोपहर 12:30 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने के बाद मां यमुना की उत्सव मूर्ति अपने शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली गांव स्थित यमुना मंदिर के लिए रवाना होगी। इससे पहले खरसाली से मां यमुना के भाई शनि देव की डोली सुबह उन्हें लेने के लिए यमुनोत्री धाम प्रस्थान करेगी।
पशुपति नाथ जाएगा 1100 लीटर गंगाजल से भरा कलश

मां गंगा के मुखवा में विराजित होने के बाद गंगोत्री धाम से रावल शिव प्रकाश सेमवाल के नेतृत्व में 1100 लीटर के जल कलश की भव्य यात्रा नेपाल स्थित पशुपतिनाथ के लिए रवाना होगी। तीर्थ पुरोहित राजेश सेमवाल ने बताया कि पिछले कई वर्षों से यह यात्रा हो रही है।
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