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उज्जैन: महाकाल मंदिर में दो पुजारियों के बीच हाथापाई, पगड़ी को लेकर क्यों हो गया विवाद?

cy520520 2025-10-23 15:37:12 views 1257
  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में बुधवार सुबह एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने भक्तों और संतों को स्तब्ध कर दिया।

दो पुजारियों के बीच पगड़ी को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि बात हाथापाई तक पहुंच गई। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

घटना सुबह करीब 8 बजे की है, जब रिनमुक्तेश्वर मंदिर के महंत महावीर नाथ अपने साथी संत शंकर नाथ के साथ गर्भगृह में प्रार्थना करने पहुंचे। महावीर नाथ ने पारंपरिक साधु पगड़ी (फेटा) पहन रखी थी। लेकिन, वहां मौजूद पुजारी महेश शर्मा ने पगड़ी पहनने पर आपत्ति जताई और कहा कि भगवान महाकाल के सामने सिर ढकना मंदिर की परंपरा के खिलाफ है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
कैसे हाथापाई तक पहुंच गई बात?

महावीर नाथ के पगड़ी न हटाने पर दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते यह बहस गाली-गलौज और धक्का-मुक्की में बदल गई। यह सब गर्भगृह के पास से शुरू होकर मंदिर परिसर के कोटि तीर्थ कुंड तक पहुंच गया। आसपास मौजूद भक्त इस घटना से डर गए और उन्हें पीछे हटना पड़ा।

इस घटना ने मंदिर समुदाय को दो खेमों में बांट दिया। महंत महावीर नाथ ने आरोप लगाया कि पुजारी महेश शर्मा ने उनकी पगड़ी जबरन उतारने की कोशिश की और उनके साथी संत को धक्का दिया। उन्होंने कहा, “साधु अपनी जटाओं को बांधने के लिए फेटा पहनते हैं। महेश शर्मा ने गर्भगृह में बदतमीजी की और संतों की परंपरा का अपमान किया।“
पुजारी का क्या है पक्ष?

दूसरी ओर, पुजारी महेश शर्मा ने अपने बचाव में कहा कि वे सिर्फ मंदिर की परंपरा का पालन कर रहे थे। उन्होंने कहा, “महाकाल के सामने कोई भी, चाहे राजा हो या साधु, सिर पर पगड़ी या मुकुट नहीं पहन सकता। महंत ने नियम तोड़ा, मुझे धक्का दिया और गालियां दीं। बहस में मैं गिर भी गया।“

इस घटना के बाद संत और पुजारी समुदाय में गुस्सा है। कुछ संतों ने महंत रामेश्वर दास जी आश्रम में बैठक की और पुजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। भर्तृहरि गुफाओं के मुख्य पुजारी पीर महंत रामनाथ महाराज ने मंदिर प्रशासन से गर्भगृह के सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की ताकि सच सामने आए। वहीं, कुछ पुजारी महेश शर्मा के समर्थन में हैं, जिनका कहना है कि उन्होंने मंदिर की परंपरा का पालन किया।
जांच के आदेश

मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा, “हम सीसीटीवी फुटेज और दोनों पक्षों के बयानों की जांच कर रहे हैं। तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।“

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