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दिवाली में कार्बाइड बम से जली आंख, डॉक्टर बोले- चली गई रोशनी

deltin33 2025-10-23 16:07:25 views 1076
  

एम्स में पटाखे से आंख में चोट लगने के बाद 25 से ज्यादा रोगी पहुंचे



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। दीपावली की खुशी में सस्ता के चक्कर में कार्बाइड बम ने आंखों को बहुत नुकसान पहुंचाया है। एम्स गोरखपुर के नेत्र रोग विभाग में 25 से ज्यादा रोगी पहुंचे हैं। पटाखे और कार्बाइड बम के कारण इनकी आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इनमें से पांच को ज्यादा दिक्कत है। इनकी आंखों में कार्निया प्रत्यारोपण की भी नौबत आ सकती है। डाक्टरों का मानना है कि कार्बाइड बम से आंखों को नुकसान पहुंचाने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है। कई लोग निजी अस्पतालों में चले गए हैं तो कई नेपाल के भैरहवां में जाकर उपचार करा रहे हैं।

एम्स के नेत्र रोग विभाग में कुशीनगर के बलवारी पट्टी निवासी 17 वर्षीय शिराज अंसारी को लेकर स्वजन पहुंचे। जांच में दाईं आंख की रोशनी जाने के प्रमाण मिले। पुतली सफेद हो चुकी है।

स्वजन ने बताया कि शिराज कार्बाडइ बम चला रहा था। कुशीनगर के 20 वर्षीय पंकज कुमार की आंख में कार्बाइड बम के कारण गंभीर चोट लगी है। महावीर छपरा निवासी 17 वर्षीय विनय कुमार की आंख भी प्रभावित हुई है।

सौ रुपये में घर-घर बना रहे बम

कार्बाइड बम भले ही अंधापन दे रहा है लेकिन खासकर युवा इसे घर में ही बनाने में जुटे हैं। प्लास्टिक की बाेतल या पाइप, आसानी से उपलब्ध कार्बाइड, पानी और रसोई गैस लाइटर की सहायता से वह बम बना रहे हैं। प्लास्टिक की पाइप या बोतल में भरे कैल्शियम कार्बाइड में जैसे ही पानी मिलाया जाता है तो एसिटिलीन गैस बनने लगती है।

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इस गैस में छोटी सी चिंगारी से धमाका होता है। चिंगारी देने का काम रसोई गैस लाइटर से किया जा रहा है। यदि प्लास्टिक कमजोर है तो धमाके के साथ यह फट जा रहा है। इससे निकलने वाली छोटी कण और कार्बाइड सीधे आंख में जा रही है। आंख के साथ ही चेहरे को भी नुकसान पहुंच रहा है।

सूत्राें का कहना है कि सौ से दो सौ रुपये में घर-घर बम बन रहा है। शिराज का कहना है कि कुशीनगर में 160 रुपये प्रति किलोग्राम में कार्बाइड आसानी से हर जगह मिल जा रहा है। वह बोतल में भरकर बम फोड़ रहा था कि बोतल फट गया। दीपावली से ज्यादा छठ पूजा में इस बम के इस्तेमाल की तैयारी है।


कार्बाइड बम और पटाखों के कारण कई लोगों की आंखों में गंभीर क्षति पहुंची है। कुछ की क्षति इतनी ज्यादा है कि कोरोना प्रत्यारोपण की नौबत आ सकती है। तत्काल अस्पताल न पहुंचकर कई लोगों ने इधर-उधर उपचार कराया, इस कारण नुकसान बढ़ता गया।
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डा. नेहा सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, नेत्र रोग विभाग, एम्स गोरखपुर
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