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2025 में मानसून ने तोड़े सारे रिकॉर्ड: 59 जगहों पर बाढ़ का दिखा भयानक मंजर, 1528 लोगों की गई जान

LHC0088 2025-10-28 19:12:03 views 1228
  

प्रतीकात्मक तस्वीर।



संजीव गुप्ता, जागरण। दो दिन पहले ही देशभर से विदा हुए मानसून में इस बार नदियों ने भी सारे पुराने रिकाॅर्ड तोड़ दिए। देश के नौ नदी बेसिनों में 59 जगहों पर बाढ़ का उच्च स्तर रिकाॅर्ड किया गया। सिर्फ गंगा बेसिन में ही ऐसी 32 घटनाएं हुईं, जिनमें 10 यमुना नदी में थीं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

क्लाइमेट ट्रेंड्स का विश्लेषण बताता है कि वर्षा अब वैसी नहीं रही जैसी पहले हुआ करती थी। कभी सूखा पड़ता है, तो कभी आसमान जैसे खुलकर बरस पड़ता है। भारत में इस साल का मानसून भी कुछ ऐसा ही रहा। 45 प्रतिशत इलाकों में रिकाॅर्ड तोड़ वर्षा और पूरे देश में औसतन 108 प्रतिशत वर्षा।
उत्तर-पश्चिम भारत सबसे आगे

इस साल उत्तर-पश्चिम भारत सबसे आगे रहा। यहां 27 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज हुई। लद्दाख में तो बदरा औसत से 342 प्रतिशत ज्यादा बरसे। राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा में 60 से 70 प्रतिशत तक ज्यादा पानी बरसा। दिल्ली में 41 प्रतिशत ज्यादा वर्षा हुई तो गुजरात ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। यहां 25 प्रतिशत ज्यादा वर्षा हुई। लेकिन पूर्वोत्तर भारत में कहानी कुछ उलटी रही। असम, अरुणाचल एवं बिहार जैसे राज्यों में वर्षा 20 प्रतिशत तक कम दर्ज की गई।

मौसम विभाग के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक 2025 का मानसून लगातार दूसरे साल \“सामान्य से ऊपर\“ रहा है। हालांकि, इसके पीछे जो ट्रेंड बन रहा है, वो ज्यादा अहम है-वर्षा के दिन कम हो रहे हैं, लेकिन जब भी होती है तो बहुत ज्यादा होती है।
कहीं सैलाब, कहीं सूखा

इस साल मौसम विभाग के 36 जोनों में से 12 जगहों पर अधिक, दो जगहों पर बहुत अधिक, 19 जगह सामान्य व सिर्फ तीन जगहों पर सामान्य से कम वर्षा रही। वहीं, 1,528 लोगों की वर्षा जनित आपदाओं में मौत हो गई। मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस साल मानसून के दौरान 2,277 बार भारी या अत्यधिक वर्षा हुई। इन घटनाओं में 1,528 लोगों की जान गई। सबसे ज्यादा मौतें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में हुईं।
कम दिन, ज्यादा वर्षा

मौसम विभाग के पूर्व महानिदेशक डाॅ. केजे रमेश का कहना है, \“मानसून अब छोटा होने के बावजूद अधिक तीव्र हो गया है। पहले 60 दिन में होने वाली वर्षा अब 20 से 25 दिनों में हो रही है।\“

स्काइमेट वेदर के उपाध्यक्ष (मौसम विज्ञान एवं जलवायु परिवर्तन) कहते हैं, \“कम दबाव वाले सिस्टम अब ज्यादा टिकाऊ हो गए हैं। नमी लगातार मिलती रहती है, इसलिए बादल फटने जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं।\“
बदलते मानसून की तीन बड़ी वजहें

  • समुद्रों का गर्म होना: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी का तापमान बढ़ने से हवा में नमी ज्यादा है। यही नमी वर्षा की तीव्रता बढ़ा रही है।
  • पश्चिमी विक्षोभों की शिफ्टिंग: जो पहले सर्दियों में सक्रिय रहते थे, अब गर्मियों में भी मानसून को उत्तर की ओर खींच रहे हैं।
  • मध्य-पूर्व की गर्म हवाएं: वहां की गर्मी अब भारत तक असर डाल रही है, जिससे उत्तर-पश्चिम भारत में बिजली और तूफान वाली तेज वर्षा बढ़ी है।


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